शीतला अष्टमी पर शीतला माता को लगाया बासी भोजन का भोग
शीतला अष्टमी पर शीतला माता को लगाया बासी भोजन का भोग
रायसेन,चैत्र महीने की सप्तमी और शनिवार को शीतला अष्टमी के दिन शीतला माता की पूजा के समय सुहागिन महिलाओं ने उन्हें खास मीठे चावलों खीर पूड़ी चना दाल का भोग चढ़ाया गया । । बताया जाता है कि ये चावल गुड़ या गन्ने के रस से सप्तमी की रात को बनाए गए। ये दिन ऋतु परिवर्तन का भी संकेत देता है। ऐसा कहते हैं कि इस अष्टमी के बाद ग्रीष्म ऋतु में बासी खाना नहीं खाया जाना चाहिए। शहर में शीतला माता का इकलौता प्राचीन मंदिर नबावपुर(रामपुर)वार्ड 4 क्षेत्र में है। अष्टमी पर यहां भक्तों की भीड़ उमडती है।माहेश्वरी समाज की महिलाओं द्वारा सप्तमी पर सामूहिक बसोरा पूजन आरती व्यंजनों का लगाया भोग लगाकर पुण्य लाभ अर्जित किया।
उदयातिथि से आज….
ज्योतिषाचार्य ओमप्रकाश शुक्ला हर्ष वर्धन सोलंकी के अनुसार उदया तिथि अनुसार अष्टमी व्रत शनिवार को ही रखा जगया।शनिवार 22 मार्च को शीतला अष्टमी के दिन माता की पूजा का मुहूर्त सुबह 06.23 बजे से शाम 06.33 बजे तक रहा।
रोगों से मुक्ति
ज्योतिषाचार्य शुक्ला के अनुसार शीतला माता को बासी व ठंडे पकवानों का माता को भोग लगाया जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से देवी प्रसन्न होती हैं। व्रती के कुल में समस्त शीत जनित रोग ज्वर, चेचक, नेत्र विकार दूर होते हैं।
जबलपुर. बीमारी, महामारी से रक्षा के लिए शीतलाष्टमी का पर्व शनिवार को मनाया जाएगा। सप्तमी से ही पूजन शुरू हो गया। घमापुर स्थित शीतलामाता के इकलौते प्राचीन मंदिर में सुबह से भक्तों की भीड़ लगी। शीतलाष्टमी पर माता को बासी भोजन (बसौड़ा) का भोग लगाया जाएगा। भक्तों ने इसके लिए शुक्रवार की रात को ही गन्ने के रस, गुड़ के साथ चावल की खीर पकाई। शनिवार को सैकड़ों भक्तों के घर भोजन नहीं बनेगा। वे माता को सप्तमी को बनाये भोजन का भोग लगाकर यही भोजन प्रसाद के रूप में ग्रहण करेंगे।
