November 5, 2026

आज का पंचांग: 5 नवंबर 2026, गुरुवार | जानिए आज के शुभ मुहूर्त, राहुकाल और गोवत्स द्वादशी पूजा का समय

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आज का पंचांग 5 नवंबर 2026

शक संवत 1948, कार्तिक, कृष्ण, एकादशी, गुरुवार, विक्रम संवत् 2083। तदनुसार अंग्रेजी तारीख 5 नवंबर सन् 2026 ई॰। सूर्य दक्षिणायन, हेमंत ऋतु। राहुकाल दोपहर 02 बजकर 00 मिनट से 03 बजकर 30 मिनट तक। एकादशी तिथि प्रातः 10 बजकर 35 मिनट तक उपरांत द्वादशी तिथि का आरंभ।

उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र अगले दिन तड़के 03 बजकर 55 मिनट (6 नवंबर) तक उपरांत हस्त नक्षत्र का आरंभ। वैधृति योग अगले दिन तड़के 05 बजकर 09 मिनट (6 नवंबर) तक उपरांत विष्कुंभ योग का आरंभ। बालव करण प्रातः 10 बजकर 35 मिनट तक उपरांत कौलव करण का आरंभ। चन्द्रमा प्रातः 09 बजकर 34 मिनट तक सिंह राशि पर उपरांत कन्या राशि पर संचार करेगा।

सूर्य और चंद्रमा की स्थिति

सूर्योदय का समय: प्रातः 06:36 बजे

सूर्यास्त का समय: सायं 05:33 बजे

चंद्रोदय का समय: अगले दिन तड़के 03:45 बजे (6 नवंबर)

चंद्रास्त का समय: दोपहर 03:01 बजे

सूर्य और चंद्रमा की राशियां

सूर्य देव: तुला राशि में स्थित हैं

चन्द्र देव: सिंह राशि में (प्रातः 09:34 बजे तक), फिर कन्या राशि में प्रवेश

आज का शुभ मुहूर्त 5 नवंबर 2026 :

अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 11 बजकर 43 मिनट से 12 बजकर 26 मिनट तक रहेगा।

अमृत काल : रात्रि 08 बजकर 36 मिनट से रात्रि 10 बजकर 13 मिनट तक रहेगा।

आज का चौघड़िया मुहूर्त 5 नवंबर 2026 :

शुभ (उत्तम) : सुबह 06 बजकर 36 मिनट से 07 बजकर 58 मिनट तक।

रोग (सामान्य) : सुबह 07 बजकर 58 मिनट से 09 बजकर 20 मिनट तक।

उद्वेग (अशुभ) : सुबह 09 बजकर 20 मिनट से 10 बजकर 42 मिनट तक।

चर (सामान्य) : सुबह 10 बजकर 42 मिनट से दोपहर 12 बजकर 04 मिनट तक।

आज का अशुभ मुहूर्त 5 नवंबर 2026 :

राहुकाल : दोपहर 02 बजकर 00 मिनट से 03 बजकर 30 मिनट तक रहेगा।

गुलिक काल : सुबह 09 बजकर 00 मिनट से 10 बजकर 30 मिनट तक रहेगा।

यमगंड : सुबह 06 बजकर 00 मिनट से 07 बजकर 30 मिनट तक रहेगा।

प्रदोषकाल गोवत्स द्वादशी मुहूर्त: 05 नवंबर, शाम 05:33 से रात 08:10 बजे तक

अवधि: 02 घंटे 37 मिनट

द्वादशी तिथि प्रारंभ: 05 नवंबर, सुबह 10:35 बजे

द्वादशी तिथि समाप्त: 06 नवंबर, सुबह 10:30 बजे

आज का उपाय :आज गुरुवार व गोवत्स द्वादशी के पावन अवसर पर गाय और बछड़े की विधिवत पूजा करें, उन्हें हरा चारा व गेहूं से बने पदार्थ खिलाएं और भगवान विष्णु की पूजा करें।

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