सच्चे प्रेम और भगवान के प्रति समर्पण का प्रतीक है रुक्मिणी विवाह – राजकुमार मिश्रा
अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
जांजगीर चाम्पा – जिला मुख्यालय के चंदनिया पारा स्थित काशी विश्वेश्वर नाथ मंगल भवन में भोजासिया परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ के छठवें दिन आज आचार्यश्री राजकुमार मिश्रा महाराज के श्रीमुख से भगवान श्रीकृष्ण एवं रुक्मिणी विवाह का भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा के दौरान आचार्य जी ने रुक्मिणी विवाह प्रसंग सुनाते हुये बताया कि विदर्भ नरेश भीष्मक की पुत्री रुक्मिणी भगवान श्रीकृष्ण को अपना पति मानकर उनसे प्रेम करती थीं।
रुक्मिणीजी ने भगवान श्रीकृष्ण की महिमा सुनकर उन्हें अपने हृदय में पति के रूप में स्वीकार कर लिया था। जब उनका विवाह शिशुपाल से तय किया गया , तब उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण को संदेश भेजकर अपनी इच्छा व्यक्त की। रुक्मिणीजी के प्रेम और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान श्रीकृष्ण विदर्भ पहुँचे और रुक्मिणीजी का हरण कर उन्हें अपने साथ ले गये। इसके पश्चात भगवान श्रीकृष्ण एवं रुक्मिणीजी का विधिवत विवाह संपन्न हुआ। इस प्रसंग का वर्णन सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। आचार्यश्री ने कहा कि रुक्मिणी विवाह प्रसंग सच्चे प्रेम , अटूट विश्वास और भगवान के प्रति समर्पण का प्रतीक है।
रुक्मिणी जी की भक्ति यह संदेश देती है कि जो भक्त सच्चे मन से भगवान की शरण में जाता है , भगवान सदैव उसकी रक्षा करते हैं। कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण एवं रुक्मिणी विवाह की सुंदर झांकी प्रस्तुत की गई। श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर भगवान श्रीकृष्ण एवं रुक्मिणीजी का स्वागत किया। कथास्थल पर भक्तिमय वातावरण बना रहा तथा श्रीकृष्ण के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा। भोजासिया परिवार द्वारा आयोजित यह श्रीमद्भागवत कथा 20 सितंबर तक चलेगा। आयोजक परिवार की ओर से श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में कथा में सम्मिलित होकर भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त करने का आग्रह किया गया। इसकी जानकारी अखिल मिश्रा ने दी।
