June 6, 2026

विवाह पंचमी पर इन कामों को करने से बढ़ता है पुण्य

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धन-धान्य से भरे रहते हैं भंडार

अगहन महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को प्रभु श्रीराम और माता सीता का विवाह हुआ था इसलिए इस पंचमी तिथि को विवाह पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। विवाह पंचमी पर कुछ विशेष कार्य करने से पुण्य कर्मों में वृद्धि होती है और जीवन हमेशा खुशहाल बना रहता है। आइए, जानते हैं विवाह पंचमी पर क्या करें।


मार्गशीर्ष यानि अगहन महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को प्रभु श्रीराम और माता सीता का विवाह हुआ था, इसलिए शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को विवाह पंचमी भी कहा जाता है।
इस साल विवाह पंचमी 6 दिसंबर, शुक्रवार के दिन है। यह पर्व हर साल मार्गशीर्ष यानि अगहन महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। कई लोगों का मत है कि विवाह पंचमी पर विवाह करने से पति-पत्नी का वैवाहिक जीवन संघर्षपूर्ण रहता है इसलिए इस दिन माता-पिता अपनी बेटी का विवाह नहीं करते। वहीं, कुछ लोगों का यह भी मानना है कि सभी लोगों के अपने कर्म और नियति है, उसी के अनुसार ही किसी का वैवाहिक जीवन चलता है, ऐसे में विवाह पंचमी के दिन अपनी पुत्री का विवाह करने से कोई हानि नहीं होती। विवाह पंचमी के दिन कुछ ऐसे कार्य जरूर करने चाहिए, जिससे कि आपके पुण्य कर्म बढ़ सके। आइए, जानते हैं विवाह पंचमी पर क्या काम करना चाहिए।

विवाह पंचमी पर करें गरीब कन्या का कन्यादान

आप अगर अपनी बेटी का विवाह इस दिन नहीं करना चाहते तो भी आपको ऐसी गरीब लड़की का कन्यादान जरूर करना चाहिए, जिसके माता-पिता नहीं है। शास्त्रों में कन्यादान को सबसे बड़े दानों में से एक माना जाता है इसलिए किसी गरीब और जरुरतमंद कन्या का कन्यादान करने से आपके पुण्य कर्मों में वृद्धि होती है।

विवाह पंचमी पर दान अवश्य करें

विवाह पंचमी के दिन आपको दान भी अवश्य करना चाहिए। आप किसी संस्था, जरुरतमंद व्यक्ति, मंदिर आदि जगहों पर जाकर अपनी सामर्थ्यनुसार दान कर सकते हैं। दान में अन्नदान, जलदान, कपड़े का दान या फिर किसी की जरुरत के अनुसार कोई भी चीज दी जा सकती है।

विवाह पंचमी पर गरीबों के लिए करें भंडारा

किसी भूखे के पेट को भरने को सबसे बड़ा पुण्य माना जाता है। आपके पास अगर भंडारा करने लायक धन नहीं है, तो भी आप किसी व्यक्ति, पशु या पक्षी के लिए अन्न की व्यवस्था कर सकते हैं। भंडारे का अर्थ किसी भूखे का पेट भरने से है। पशु और पक्षियों के लिए अनाज भी व्यवस्था करना भी भंडारे की श्रेणी में आता है।

विवाह पंचमी पर राम-सीता के नाम पर लगाएं पौधे

पेड़-पौधे प्रकृति का हिस्सा हैं इसलिए विवाह पंचमी के दिन वृक्षारोपण करने से प्रकृति माता प्रसन्न होती है। आप अपनी पसंद के अनुसार अपने घर या फिर किसी अन्य स्थान पर राम और सीता जी के नाम पर कोई पौधा लगा सकते हैं। प्रकृति को पौधे भेंट स्वरूप देने से पुण्य कर्मों में वृद्धि होती है। साथ ही प्रभु श्रीराम और माता सीता की कृपा आप पर बनी रहती है।

विवाह पंचमी पर भजन, पूजा-पाठ और गंगा स्त्नान करें

विवाह पंचमी का दिन भजन-कीर्तन, पूजा-पाठ और गंगा स्नान के लिए अति उत्तम माना जाता है इसलिए आपको विवाह पंचमी पर प्रभु श्रीराम और माता सीता की पूजा करके भजन-कीर्तन जरूर करना चाहिए। साथ ही विवाह पंचमी पर गंगा स्नान का भी बहुत महत्व है। भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी रामजी और लक्ष्मी जी का रूप माने जाते हैं इसलिए विवाह पंचमी पर भगवान श्री विष्णु व माता लक्ष्मी की पूजा भी करनी चाहिए।

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