June 6, 2026

धान से बनी राखियों से छत्तीसगढ़ को गौरवान्वित कर रहे हैं चंद्रप्रकाश साहू, देशभर में हो रही है कलाकारी की मांग

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इतेश न्यूज़ सर्विस, छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के छोटे से गांव बोरई के निवासी चंद्रप्रकाश साहू, जिन्हें “धान कलाकार” के नाम से जाना जाता है, इन दिनों अपनी अनोखी कला से पूरे देश का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। चंद्रप्रकाश साहू घर पर ही धान से आकर्षक राखियाँ तैयार कर रहे हैं, जो पूरी तरह हाथ से बनाई जाती हैं।

इन राखियों की खासियत यह है कि ये न सिर्फ पर्यावरण के अनुकूल हैं, बल्कि पारंपरिक छत्तीसगढ़ी संस्कृति की झलक भी इनमें देखने को मिलती है। यही कारण है कि इनकी मांग केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं है, बल्कि दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, पुणे, नागपुर, जमशेदपुर, गुवाहाटी, कोलकाता और खड़गपुर जैसे बड़े शहरों से भी ऑर्डर आ रहे हैं।

धान से सिर्फ राखी ही नहीं, बल्कि अन्य कलात्मक वस्तुएँ भी बनाई जाती हैं जिन्हें लोग विशेष ऑर्डर देकर मंगवाते हैं। चंद्रप्रकाश साहू अब तक 500 से अधिक बच्चों को यह कला सिखा चुके हैं और कई स्कूलों व कॉलेजों में प्रशिक्षण देने के लिए आमंत्रित किए जा चुके हैं।

उनकी कला को कई राष्ट्रीय मंचों पर भी सराहा गया है — महाकुंभ में संस्कृति मंत्रालय की ओर से आयोजित प्रदर्शनी में भागीदारी से लेकर आकाशवाणी के विशेष कार्यक्रमों तक वे अपनी उपस्थिति दर्ज करवा चुके हैं।

साहू ने वर्ष 2024 में इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ से लोककला में स्नातक की पढ़ाई पूरी की और लोकनृत्य के क्षेत्र में भी राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुति दी है। वे लोकनृत्य का प्रशिक्षण भी नियमित रूप से दे रहे हैं।

चंद्रप्रकाश साहू अपने हुनर और समर्पण से ‘धान का कटोरा’ कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ को एक नई पहचान दिला रहे हैं। उनकी यह पहल न केवल स्थानीय कला को जीवित रखने का माध्यम है, बल्कि युवाओं को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रेरित भी कर रही है।

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