August 7, 2026

शोक में डूबा लोक कला जगत: मशहूर पंडवानी गायिका पद्म विभूषण तीजन बाई का रायपुर में निधन

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शोक में डूबा लोक कला जगत: मशहूर पंडवानी गायिका पद्म विभूषण तीजन बाई का रायपुर में निधन

रायपुर: लंबे समय से बीमार चल रहीं मशहूर पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई का रायपुर के अस्पताल में निधन हो गया। वह 70 साल की थीं। उन्होंने शनिवार-रविवार की दरमियानी रात 3:15 बजे रायपुर एम्स (AIIMS) में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लोक कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

तीजन बाई ने अपनी दमदार आवाज, जीवंत अभिनय और अनूठी प्रस्तुति शैली से महाभारत की कथाओं को मंच पर इस तरह जीवंत किया कि ‘पंडवानी’ देश की सीमाओं से निकलकर अंतरराष्ट्रीय पहचान हासिल कर सकी। उन्होंने दशकों तक भारत की लोक परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हुए दुनिया के अनेक देशों में प्रस्तुतियां दीं और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

महज 13 साल की उम्र में दी थी पहली प्रस्तुति

भिलाई के पास गनियारी गांव में जन्मी तीजन बाई के पिता हुनुकलाल परधा और माता सुखवती थीं। बचपन में वे अपने नाना ब्रजलाल से महाभारत की कथाएं सुनती थीं, और यही संस्कार आगे चलकर उनके जीवन का मजबूत आधार बने।

उनकी इस अनूठी प्रतिभा को पहचानते हुए उमेद सिंह देशमुख ने उन्हें सही मार्गदर्शन दिया। इसके बाद महज 13 वर्ष की आयु में उन्होंने अपना पहला सार्वजनिक मंच प्रदर्शन किया और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

हबीब तनवीर की पारखी नजर और अंतरराष्ट्रीय सफर

तीजन बाई के जीवन में सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब देश के प्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर ने उनकी प्रस्तुति देखी। उनकी कला से प्रभावित होकर हबीब तनवीर ने उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया। इसके बाद उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी सहित कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय हस्तियों के समक्ष अपनी कला का सफल प्रदर्शन किया और खूब वाहवाही बटोरी।

पद्मश्री से पद्म विभूषण तक: कई शीर्ष सम्मानों से थीं नवाजी गईं

भारतीय लोक कला में उनके अतुलनीय योगदान के लिए देश ने उन्हें सिर-आंखों पर बिठाया। उन्हें भारत सरकार द्वारा तीनों शीर्ष नागरिक सम्मानों से सम्मानित किया गया था:

पद्मश्री

पद्म भूषण

पद्म विभूषण (देश का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान)

इसके अलावा उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, श्रेष्ठ कला आचार्य सम्मान, देवी अहिल्या सम्मान, एम.एस. सुब्बालक्ष्मी शताब्दी पुरस्कार और डी.लिट की मानद उपाधि सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया था।

सांस्कृतिक जगत की अपूरणीय क्षति

डॉ. तीजन बाई का जाना केवल एक महान कलाकार का निधन नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ की उस सांस्कृतिक विरासत की एक अपूरणीय क्षति है, जिसने लोककला को विश्व मंच पर सर्वोच्च सम्मान दिलाया। उनकी कड़कती आवाज भले ही अब हमेशा के लिए थम गई हो, लेकिन पंडवानी के इतिहास और देश-दुनिया के लोक कला प्रेमियों के दिलों में उनकी विरासत हमेशा अमर रहेगी।