May 1, 2026

गर्मियों में हर्बल टी का सहारा लेना हो सकता है बेहतर विकल्प

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गर्मी के कारण शरीर में पित्त बढ़ता है और पित्त की यह अधिकता अक्सर गुस्से, चिड़चिड़ापन और बेचैनी जैसे लक्षणों को जन्म देती है। छोटी-छोटी बातों पर क्रोधित होना, अधीरता दिखाना, सिर में गर्मी महसूस होना, और भीतर की अशांति कई बार बढ़े हुए पित्त का स्पष्ट संकेत हो सकते हैं। ऐसे में, गर्मियों के दौरान पित्त को संतुलित रखना अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है ताकि शारीरिक और मानसिक शांति बनी रहे। इस संबंध में आयुर्वेद का मानना है कि यदि शरीर को पर्याप्त शीतलता और आराम मिले, तो मन और तन दोनों शांत हो सकते हैं। गर्मियों में पर्याप्त विश्राम करने से शरीर की ऊर्जा बनी रहती है और मन भी प्रसन्न रहता है। प्राचीन भारतीय ग्रंथों में ज्येष्ठ माह में दिन में सोने और भरपूर आराम करने की सलाह दी जाती है। इसके साथ ही, यदि आप शरीर को अंदर से शीतल रखते हैं, तो पित्त स्वतः ही संतुलित रहता है। इसके लिए कुछ प्रभावी उपाय हैं, जिन्हें अपनी दिनचर्या में शामिल करने से न केवल गुस्सा कम होगा, बल्कि समग्र स्वास्थ्य में भी सुधार आएगा। सबसे पहले, गर्मियों में चाय का सेवन कम करना चाहिए, क्योंकि यह शरीर की आंतरिक गर्मी को और बढ़ा देती है, जिससे जलन और बेचैनी पैदा होती है।
इसके बजाय, हर्बल टी का सहारा लेना एक बेहतर विकल्प है। तुलसी, गुलाब की पत्तियां, पैशनफ्लावर और कैमोमाइल जैसी जड़ी-बूटियों को मिलाकर बनाई गई हर्बल टी को दिन में दो बार पीने से हार्मोन संतुलित होते हैं और तनाव कम करने में मदद मिलती है। यह शरीर को अंदर से ठंडक भी प्रदान करती है। दूसरा प्रभावी उपाय है घी नस्य। यह आयुर्वेदिक प्रक्रिया शरीर के पित्त को संतुलित करने में मदद करती है, साथ ही शरीर के रूखेपन को कम करती है और मस्तिष्क व मन दोनों को शांति प्रदान करती है। इसके लिए रात को सोते समय शुद्ध गाय के घी की कुछ बूंदें नाक में डालने से तनाव कम होता है और तंत्रिका-तंत्र शांत होता है, जिससे नींद भी बेहतर आती है। पित्त और क्रोध को शांत करने के लिए चंदन का लेपन भी एक बहुत प्रभावी उपाय माना जाता है। चंदन की तासीर ठंडी होती है और इसे माथे पर लगाने से शरीर का तापमान संतुलित रहता है, जिससे मन की अशांति कम होती है।
इसके अलावा, भृंगराज या नारियल तेल से मालिश करना भी बेहद फायदेमंद है। यदि लोगों को गर्मियों में गुस्सा और बेचैनी दोनों होने लगती है, तो तलवों और सिर की मालिश करने से अद्भुत आराम मिलता है। यह शरीर को ठंडा करता है और तंत्रिका तंत्र को शांत करता है, जिससे मानसिक स्थिरता आती है और चिड़चिड़ापन कम होता है। इन सरल आयुर्वेदिक उपायों को अपनाकर गर्मियों में भी मन को शांत और शरीर को स्वस्थ रखा जा सकता है। बता दें कि गर्मियों का मौसम आते ही मन और तन का संतुलन बनाए रखना एक चुनौती बन जाता है, क्योंकि बाहर के बढ़ते तापमान के साथ शरीर के भीतर का तापमान भी अक्सर अनियंत्रित हो जाता है।