राजनीति में थोड़ा साहित्य हो और साहित्य में राजनीति कम हो तो बेहतर है: शशांक शर्मा
डॉ खूबचंद बघेल के साहित्य पर हुई चर्चा
125वीं जयंती पर साहित्य अकादमी का आयोजन
रायपुर। डॉ. खूबचंद बघेल जयंती के अवसर पर साहित्य अकादमी के द्वारा पुरातत्व विभाग के महंत घासीदास संग्रहालय सभागार में एक परिचर्चा का आयोजन किया गया। डॉ खूबचंद बघेल के साहित्यिक अवदान विषय बोलते हुए वक्तागण जागेश्वर प्रसाद, आशीष सिंह ठाकुर एवं अरविंद मिश्र ने अपनी बातें कही। कार्यक्रम की अध्यक्षता साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा ने की।
जागेश्वर प्रसाद ने डॉ बघेल के राजनीतिक जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा, खूबचंद बघेल केवल एक समाज के लिए महापुरुष नहीं थे, बल्कि संपूर्ण छत्तीसगढ़ के नेता थे। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में डॉ बघेल पक्के गांधीवादी थे, उन्होंने अछूतोद्धार के क्षेत्र में बड़ा काम किया। वे छत्तीसगढ़ राज्य के पहले स्वप्नदृष्टा नहीं थे, छत्तीसगढ़ राज्य की पहली परिकल्पना पंडित सुंदरलाल शर्मा थे। छत्तीसगढ़ में सामाजिक जागृति जगाने का भरपूर प्रयास किया।

आशीष सिंह ठाकुर ने डॉ बघेल की पत्रकारिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि डॉ बघेल एक अच्छे संपादकीय लेखक थे। साप्ताहिक राष्ट्रबंधु में अनेक ऐसे संपादकीय लेख लिखे जिनसे आज के संपादक प्रेरणा ले सकते हैं। एक अन्य वक्ता अरविंद मिश्र ने डॉ खूबचंद बघेल के नाटकों पर चर्चा करते हुए कहा, उनके नाटकों में समाज के लिए गहन संदेश छुपे हैं। उनके द्वारा रचित नाटक जरनैल सिंह में उन्होंने छत्तीसगढ़ के युवाओं को सेना से जुड़ने के लिए प्रेरित किया है।
अध्यक्षीय वक्तव्य में शशांक शर्मा ने कहा, डॉ खूबचंद बघेल ने अनेक प्रकार से साहित्य जगत को अपना योगदान दिया है। डॉ बघेल मूलतः राजनीतिक व्यक्ति थे लेकिन समाज में व्याप्त अछूत जैसी कुरीतियों को देखने के बाद जनजागरण के लिए ऊंच नीच नाटक लिखा। यह राजनीति में साहित्य का अच्छा प्रयोग है। उन्होंने कहा, राजनीति में थोड़ा साहित्य हो जय तो राजनीति अच्छी हो जाय और साहित्य में राजनीति कम हो जाए तो साहित्य अच्छा हो जाय। श्री शर्मा ने कहा, एक साहित्यकार को संवेदनशील होना चाहिए जैसे डॉ बघेल के अंदर थी। खूबचंद बघेल ने सामाजिक कुरीति पर लिखे नाटकों में कभी किसी को खलनायक नहीं बनाया बल्कि सामंजस्य से समाज की समस्या का समाधान करने संदेश देते हैं।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रोतागण उपस्थित थे जिनमें डॉ सुशील त्रिवेदी, राहुल सिंह, डॉ लक्ष्मीशंकर निगम, रामेश्वर शर्मा, महेशचंद्र शर्मा, शकुंतला तरार, ममता आहार, ऋतुराज साहू, सुयश शुक्ला, जगभन सिंह चौहान प्रमुख रहे। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती सीमा शर्मा ने किए तथा आभार प्रदर्शन सतीश कौशिक ने किया।

