June 6, 2026

हरियाणा विधानसभा चुनाव : वोटरों ने भाजपा को दी बूस्टर डोज, कांग्रेस के हाथ फिर लगी हताशा

Haryana

विनोद पाठक
एक्जिट पोल एकबार फिर फेल साबित हुए। हरियाणा विधानसभा चुनाव में सभी भविष्यवाणियों को झूठलाते हुए भाजपा जीत की हैट्रिक लगाती दिख रही है। सुबह शुरुआती रुझानों में भले भाजपा कांग्रेस से बहुत पीछे थी, लेकिन सुबह साढ़े नौ बजे के बाद उसने ऐसा कमबैक किया, जिसने सभी राजनीतिक पंडितों को चौंका दिया। हरियाणा के रुझान यदि नतीजों में बदलते हैं तो भाजपा को एक बूस्टर डोज यहां से मिलने वाली है। एक नए उत्साह का संचार पार्टी में होने वाला है। निश्चित ही इसका प्रभाव आगामी महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभा चुनावों में देखने को मिलेगा।
हरियाणा विधानसभा चुनाव से कुछ समय पहले भाजपा ने मनोहर लाल खट्टर को हटाकर नवाब सिंह सैनी को मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंपी थी। खत्री पंजाबी के बजाय ओबीसी पर दांव लगाया था। तब यह माना जा रहा था कि सैनी को बलि का बकरा बना दिया गया है, लेकिन अब रुझानों से साफ हो गया है कि भाजपा का ओबीसी कार्ड सही साबित हुआ।
भाजपा को बहुत बड़ा फायदा अहीरवाल क्षेत्र, जिसमें गुड़गांव, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़ और नारनौल जिले आते हैं, में हो रहा है। भाजपा वर्ष 2014 से अहीरवाल क्षेत्र में मजबूत रही है। इसका एक बड़ा कारण केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह भी हैं। राव इंद्रजीत सिंह जब तक कांग्रेस में थे, तब तक अहीरवाल क्षेत्र में कांग्रेस मजबूत थी, वो जब से भाजपा में आए हैं, इस क्षेत्र में भाजपा मजबूत हो गई है।
कांग्रेस को पिछले चुनाव में जाट क्षेत्र, जिसमें रोहतक, झज्जर और सोनीपत आते हैं, से काफी अच्छा समर्थन मिला था। इन जिलों में जाट मतदाताओं की संख्या 30 प्रतिशत से अधिक है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का यह प्रभाव वाला क्षेत्र है। हुड्डा के कारण कांग्रेस पिछली चुनाव में 31 सीटें जीतने में सफल रही थी, लेकिन केवल जाट वोटों के सहारे कांग्रेस की नैया पार होती नहीं नजर आ रही। यदि हरियाणा में जातीय समीकरणों को देखें 22 प्रतिशत जाट, 20 प्रतिशत दलित, 30 प्रतिशत ओबीसी, 16.5 प्रतिशत जनरल, 8 प्रतिशत पंजाबी और 3.5 प्रतिशत मुस्लिम वोट हैं।
जब कांग्रेस के पक्ष में जाट मतदाता लामबंद हुए तो बाकी जातियों ने गुपचुप भाजपा के पक्ष में माहौल बनाना शुरू कर दिया। कांग्रेस के पास जाट वोटों के अलावा दलित और मुस्लिम वोट भी हैं, लेकिन चुनाव के रुझान बता रहे हैं कि भाजपा ने कांग्रेस के दलित वोट में सेंध लगा दी है। ऐसे में कुमारी शैलजा का महत्व कांग्रेस में बढ़ाने वाला है, क्योंकि कांग्रेस अब केवल भूपेंद्र सिंह हुड्डा के भरोसे हरियाणा को नहीं जीत सकती, यह बात उसे समझ में आ रही होगी।
भाजपा की सोशल वेलफेयर स्कीम्स और महिलाओं को लेकर चलाई जा रही योजनाओं ने काफी काम किया है। महिलाओं का ऐसा विषय है, जिसे किसी भी सर्वे या एक्जिट पोल ने उस तरीके से नहीं उठाया, जैसा उठाया जाना चाहिए था। यह माना जा रहा है कि महिलाओं ने भाजपा के पक्ष में बिना शोर मचाए वोट किया है, जैसा मध्य प्रदेश में देखने को मिला था।
एक और मुद्दा जो राहुल गांधी ने अपनी हर सभा में उठाया, वो अग्निवीर स्कीम का है। हरियाणा में इस मुद्दे को इसलिए भी बड़ा बताया जा रहा था, क्योंकि हरियाणा से सेना में बड़ी संख्या में लोग जाते हैं। अब अग्निवीर का मुद्दा थोड़ा धीमा होगा, यह दिख रहा है। किसान या पहलवान के मुद्दे भी कांग्रेस के बहुत काम नहीं आए हैं।
वैसे हरियाणा में इस चुनाव में राहुल गांधी प्रचार से थोड़ा दूर रहे। वो अंतिम तीन दिन ही प्रचार में उतरे। बहुत कम चुनावी सभाएं कीं। उनके मुकाबले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा में अधिक सभाएं कीं। ज्यादा विधानसभा क्षेत्रों को कवर किया। भाजपा ने अपनी पूरी ताकत हरियाणा में लगा दी थी। यदि दूसरी पार्टियों की बात करें तो इनेलो, आम आदमी पार्टी और बसपा ने कहीं न कहीं कांग्रेस के वोटों में सेंध लगाई है।
आम आदमी पार्टी कांग्रेस से चुनाव पूर्व समझौता चाहती थी, जिसे कांग्रेस ने नकार दिया था। आम आदमी पार्टी को 1.65 प्रतिशत के आसपास वोट मिल रहे हैं, जबकि इनेलो 4.52 प्रतिशत वोट ले रही है और बसपा ने भी 1.63 प्रतिशत के आसपास वोट लिया है। यदि इंडी गठबंधन एक होता तो कांग्रेस को कुछ फायदा जरूर होता। रुझानों से साफ दिख रहा है कि भाजपा हरियाणा में फिर सरकार बना रही है। नवाब सिंह सैनी को पुरस्कार मिलता दिख रहा है।

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