June 6, 2026

जहां सुरों ने रोकी बलि, और बचाई बेटियाँ – संगीत से उठी नई चेतना

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संगीत से सामाजिक परिवर्तन की ओर: हिरेश सिन्हा और जितेश्वरी सिन्हा की अनोखी पहल

इतेश न्यूज़ सर्विस, छत्तीसगढ़- छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक भूमि से उभरे दो संवेदनशील कलाकार, हिरेश सिन्हा और जितेश्वरी सिन्हा, अपने गीतों के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं। इनकी रचनाएं मनोरंजन से परे, सामाजिक, आध्यात्मिक और नैतिक चेतना को जाग्रत करने वाली साबित हो रही हैं।

1. तोला का बलि में देवव दाई – करुणा और वेदांत की पुकार

यह गीत मंदिरों में पशुबलि जैसी अमानवीय परंपराओं के विरुद्ध गूंज उठता है। गीत शास्त्रों और उपनिषदों से प्रमाण प्रस्तुत करते हुए यह प्रश्न करता है कि क्या किसी की हत्या ईश्वर को स्वीकार्य हो सकती है।
इस गीत के प्रभाव से अब तक छत्तीसगढ़ के 31 मंदिरों में बलिप्रथा पर रोक लग चुकी है, और 1117 से अधिक लोगों ने मांसाहार छोड़कर करुणा का मार्ग अपनाया है।

2. बेटी बनके आबे – कोख से कुल तक की रक्षा का स्वर

यह गीत बालिका भ्रूण हत्या और घटती बालिका अनुपात जैसे संवेदनशील विषयों पर समाज का ध्यान केंद्रित करता है। “बेटी देवी का रूप है, उसके बिना सृष्टि अधूरी है” जैसे विचारों से यह गीत गहरी भावनात्मक और वैचारिक प्रतिक्रिया उत्पन्न करता है।
यह रचना धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से बेटियों के महत्व को रेखांकित करती है और समाज में संतुलन स्थापित करने की अपील करती है।

3. करनी के मैं फल पाहुं – कर्म और सत्य की चेतना

इस गीत में कर्मफल की अवधारणा को केंद्र में रखा गया है। “कर्म का फल निश्चित है, भले देर हो, पर अंधेर नहीं” – यह संदेश श्रोताओं को आत्मविश्लेषण के लिए प्रेरित करता है।
कई लोगों ने इस गीत को आत्मचिंतन का माध्यम बनाकर अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में कदम उठाया है।

4. मोर बर दारू छोड़ देना – एक पत्नी की चुप वेदना से निकला क्रांति स्वर

यह गीत शराब जैसी सामाजिक बुराई के विरुद्ध एक घरेलू स्त्री की वेदना को आवाज देता है। जब एक पत्नी अपने पति से कहती है – “मैंने तुम्हारे लिए सब कुछ छोड़ा, क्या तुम मेरे लिए शराब नहीं छोड़ सकते?” – तो यह संवाद हजारों परिवारों की व्यथा को अभिव्यक्त करता है।
इस गीत पर आधारित शॉर्ट फिल्म ने गहरी सामाजिक प्रतिक्रिया उत्पन्न की है, जिससे प्रेरित होकर अनेक पुरुषों ने शराब का त्याग किया और अपने परिवार के साथ पुनः जुड़ाव महसूस किया।

निष्कर्ष

हिरेश सिन्हा और जितेश्वरी सिन्हा की संगीत यात्रा यह सिद्ध करती है कि गीत केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का प्रभावशाली माध्यम बन सकते हैं। जब संगीत में संवेदना, विवेक और सच्चाई का संगम होता है, तब वह समाज के अंधकार में प्रकाश की दिशा दिखा सकता है।

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