अनुज शर्मा की वापसी को मिला दर्शकों का प्यार, लेकिन ‘सुहाग’ नहीं छोड़ पाई गहरी छाप
इतेश सोनी रायपुर। लंबे समय बाद बड़े पर्दे पर वापसी कर रहे अनुज शर्मा की फिल्म ‘सुहाग’ ने दर्शकों में उत्सुकता तो जगाई, लेकिन फिल्म उम्मीद के मुताबिक प्रभाव छोड़ने में नाकाम रही। त्रिकोणीय प्रेम कहानी पर आधारित इस फिल्म को समीक्षकों से मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली है।
विधायक बनने के बाद अनुज शर्मा का यह पहला बड़ा कमबैक माना जा रहा था। फिल्म में वह अजय की भूमिका में हैं, जो पूजा (सृष्टि देवांगन) से प्रेम करता है, लेकिन हालातवश खुशी (अनिकृति चौहान) से विवाह कर लेता है। कहानी तब मोड़ लेती है जब पूजा की दोबारा एंट्री होती है और अजय की ज़िंदगी में भावनात्मक उथल-पुथल मच जाती है।
अभिनय में दम, स्क्रिप्ट में ढीलापन
अनुज शर्मा ने एक बार फिर साबित किया कि अभिनय में वह आज भी मजबूत खिलाड़ी हैं। वहीं अनिकृति चौहान और सृष्टि देवांगन ने भी अपने किरदारों को अच्छी तरह निभाया है। देवेश तिवारी का किरदार कमजोर स्क्रिप्ट की भेंट चढ़ गया।
तकनीकी पक्ष और निर्देशन
फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर सूरज महानंद का है, जो दृश्य के अनुरूप भावनात्मक गहराई देता है। संवादों में पत्रकार देवेश तिवारी का योगदान सराहनीय है, जिनके कुछ डायलॉग्स दर्शकों की तालियां बटोरने में सफल रहे। राहुल थवाईत का निर्देशन औसत से थोड़ा बेहतर कहा जा सकता है, परन्तु कमजोर स्क्रीनप्ले और दोहराव वाले दृश्य फिल्म की रफ्तार को प्रभावित करते हैं।
फिल्म ‘सुहाग’ उन दर्शकों को पसंद आ सकती है जो पारंपरिक प्रेम कहानियों में भावनात्मक जटिलताओं को तलाशते हैं। अनुज शर्मा की वापसी फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है, लेकिन कहानी और प्रस्तुतिकरण में नवीनता की कमी इसके प्रभाव को सीमित कर देती है।
