June 6, 2026

घरेलू विवाद और बेटियां होने की वजह से प्रताड़ित एक विवाहिता ने ज़हर खाकर की आत्महत्या का प्रयास

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घरेलू विवाद और बेटियां होने की वजह से प्रताड़ित एक विवाहिता ने ज़हर खाकर की आत्महत्या का प्रयास

बलौदाबाजार, जिले के कसडोल थाना क्षेत्र के ग्राम झबड़ी में घरेलू विवाद और बेटियां होने की वजह से प्रताड़ित एक विवाहिता ने ज़हर खाकर आत्महत्या का प्रयास कर लिया। महिला की हालत गंभीर बनी हुई है और उसे कसडोल के शासकीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यह मामला समाज में व्याप्त कुप्रथाओं और बेटियों को बोझ मानने की मानसिकता पर एक बार फिर सवाल खड़े कर रहा है।

ग्राम जलसो थाना पचपेड़ी निवासी पीड़िता के पिता ने पुलिस को दी गई शिकायत में बताया कि उनकी बेटी अंजली बंजारे का विवाह वर्ष 2021 में झबड़ी निवासी ओमप्रकाश बंजारे से सामाजिक रीति-रिवाजों के साथ हुआ था। विवाह के बाद शुरुआती दो वर्षों तक दाम्पत्य जीवन सामान्य रहा। इस दौरान अंजली ने दो बेटियों को जन्म दिया। परिजनों के मुताबिक, इसी बात को लेकर अंजली के पति, सास और ससुर उसके साथ आए दिन विवाद करने लगे।

शिकायतकर्ता ने बताया कि बेटी अंजली अक्सर फोन पर अपने मायके वालों से पति और ससुरालजनों की प्रताड़ना की शिकायत करती रहती थी। 15 अगस्त की सुबह भी उसने फोन कर कहा कि पति, सास और ससुर ने फिर से उसे गालियां दीं और मारपीट की। पति ओमप्रकाश ने उस पर हाथ मुक्का से हमला किया, जबकि सास-ससुर ने अश्लील गालियां दीं और धमकियां भी दीं। इस घटना के कुछ ही देर बाद अंजली ने मानसिक रूप से आहत होकर खेतों में डालने वाले रासायनिक खाद यूरिया का सेवन कर लिया। मायके से पिता और भाई जब ससुराल पहुंचे, तो उन्हें जानकारी मिली कि अंजली को गंभीर हालत में कसडोल के शासकीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फिलहाल वह उपचाराधीन है।

परिजनों का कहना है कि यह पूरी तरह से पति और ससुरालवालों की प्रताड़ना का नतीजा है। अगर समय रहते घरेलू झगड़े और बेटियों को लेकर हो रही उपेक्षा पर रोक लगाई जाती तो उनकी बेटी को यह कदम नहीं उठाना पड़ता। पुलिस ने पीड़िता के पिता की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि अंजली की हालत में सुधार होगा या नहीं।

डॉक्टरों के अनुसार, ज़हर का सेवन करने से उसके स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ा है और अगले 24 घंटे बेहद अहम होंगे। यह घटना न केवल एक परिवार के लिए त्रासदी है, बल्कि समाज के लिए भी चेतावनी है कि आज भी बेटियों को लेकर भेदभाव और अंधविश्वास जैसी मानसिकता लोगों के जीवन को तबाह कर रही है। सरकार और समाज मिलकर ऐसी सोच के खिलाफ आवाज उठाए बिना ऐसी घटनाओं पर रोक लगाना मुश्किल है।

 

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