June 14, 2026

तीज 2025: भादो माह में कब-कब मनाया जाता है तीज का त्योहार, जानें इसका महत्व

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तीज 2025: भादो माह में कब-कब मनाया जाता है तीज का त्योहार, जानें इसका महत्व

हिंदू धर्म में तीज का त्यौहार सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। तीज का त्यौहार साल में तीन बार आता है। साल की पहली तीज सावन के महीने में मनाई जाती है, जिसे हरियाली तीज के नाम से जाना जाता है। अगली तीज हरियाली तीज के 15 दिन बाद आती है।

सावन के बाद भाद्रपद का महीना आता है। कजरी तीज और हरतालिका तीज भाद्रपद के महीने में आती हैं। कजरी तीज का त्यौहार रक्षाबंधन के तीन दिन बाद मनाया जाता है। यह भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। कजरी तीज को बड़ी तीज और कजली तीज भी कहते हैं। कुछ जगहों पर इसे सातुड़ी तीज भी कहा जाता है।

कजरी तीज 2025: कजरी तीज का त्यौहार भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। वर्ष 2025 में भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि 11 अगस्त 2025 को प्रातः 10.33 बजे प्रारंभ होगी, जो 12 अगस्त 2025 को प्रातः 8.40 बजे समाप्त होगी। कजरी तीज व्रत 12 अगस्त, मंगलवार को मनाया जाएगा।

इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और जीवन में उन्नति के लिए व्रत रखती हैं।

पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव के लिए कजरी तीज का व्रत रखा था। उन्होंने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए यह व्रत रखा था और उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था।

हरतालिका तीज 2025: हरतालिका तीज व्रत भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है। वर्ष 2025 में तृतीया तिथि 25 अगस्त को प्रातः 3.04 बजे प्रारंभ होगी और 26 अगस्त को प्रातः 4.24 बजे समाप्त होगी। हरतालिका तीज व्रत सोमवार, 25 अगस्त 2025 को मनाया जाएगा।

इस दिन प्रातः पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6.17 बजे से 8.57 बजे तक रहेगा।

इस दिन प्रदोष काल में पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 7.39 बजे से 9.47 बजे तक रहेगा।

इस दिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की रेत से बनी मूर्तियों की पूजा करती हैं और सुखी वैवाहिक जीवन और संतान प्राप्ति की कामना करती हैं।

हरतालिका तीज व्रत विवाहित महिलाएं रखती हैं। हरतालिका तीज की कथा के अनुसार, माता पार्वती की सहेलियों ने उनका अपहरण कर लिया था और उन्हें घने जंगल में ले गई थीं ताकि उनके पिता पार्वती की इच्छा के विरुद्ध उनका विवाह भगवान विष्णु से न कर दें।