सर्व विद्याओं का राजा है राजयोग – साध्वी शशिप्रभा देवी
अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
जांजगीर चाम्पा – ब्रह्मा कुमारी विश्वविद्यालय की प्रवक्ता और साध्वी शशि प्रभा देवी ने अम्बे रेसीडेंसी प्रांगण में आयोजित श्रीमद्भागवत गीता ज्ञान यज्ञ के सातवें दिन श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुये कहा कि राजयोग सर्व विद्याओं का राजा है। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने गीता के नौवें अध्याय में राजयोग की गहन और गूढ़ रहस्यों को उजागर किया और कहा कि आत्मा से परमात्मा का सर्वोच्च सबंध मिलन ही राजयोग हैं। राज योग में ज्ञान योग , भक्ति योग , समत्व योग ,हठ योग सभी समाये हुये हैं , इसलिए राजयोग को सर्व योग का राजा कहा गया है। ब्रह्मा कुमारी शशिप्रभा देवी ने श्रद्धालुओं से कहा कि वे अपनी कमजोरियों और बुराईयों का दान परमात्मा को दें , इससे मन में हल्कापन , संतुष्टता और खुशी का संचार होगा। उन्होंने यह भी कहा कि जीवन में श्रेष्ठ संकल्प लेने वालों को परमात्मा का साथ और आशीर्वाद हमेशा प्राप्त होता हैं। गीता सार प्रवचन के अंतिम दिन श्रद्धालुओं ने दक्षिणा स्वरूप परमपिता परमात्मको साक्षी मानकर अपनी कमज़ोरियों को दान देने हेतु दृढ़ संकल्प किया। गौरतलब है कि कथा का आरंभ दिनांक 26 जनवरी से हजारी गली में लक्ष्मीचंद देवांगन- श्रीमति उमा देवांगन द्वारा अपने माता-पिता के वार्षिक श्राद्ध निमित्त किया जा रहा था। कथा का कवरेज करने स्वतंत्र पत्रकार अरविंद तिवारी की ओर से प्रतिनिधि लेखक शशिभूषण सोनी ने किया। उन्होंने कथा विवेचना करते हुये राजयोग की विशेषताओं को उजागर किया कि राजयोग में ज्ञान योग , भक्ति योग , समत्व योग , हठ योग सभी समाये हुये हैं। राजयोग को सर्वांगीण योग और सर्व योगों का राजा कहा गया है , जो मनुष्य को अपने जीवन को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाने में मदद करता हैं।
