November 6, 2026

छत्तीसगढ़ में गन्ना किसानों के लिए बड़ी राहत: ₹425 प्रति क्विंटल तय हुआ दर

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रायपुर : छत्तीसगढ़ के गन्ना उत्पादक किसानों के लिए राहत भरी खबर है। राज्य सरकार ने गन्ना मूल्य और बोनस से संबंधित व्यवस्था में बदलाव करते हुए किसानों की आमदनी बढ़ाने की दिशा में कदम उठाया है। गन्ने के लिए 425 रुपये प्रति क्विंटल की दर निर्धारित किए जाने के बाद सूरजपुर जिले के माँ महामाया शक्कर कारखाना, केरता में आभार एवं कृषक चौपाल कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने किसानों को बोनस राशि वितरित की और खेती को अधिक लाभकारी बनाने के उपायों पर चर्चा की। कार्यक्रम में गन्ना उत्पादक किसानों ने राज्य सरकार के निर्णय पर खुशी जताई। कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि किसानों की आर्थिक समृद्धि सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा को मजबूत बनाने में किसानों की महत्वपूर्ण भूमिका है। किसानों की मेहनत से ही कृषि उत्पादन बढ़ रहा है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।

आधुनिकीकरण पर दिया जोर

कृषि मंत्री ने बताया कि सरगुजा अंचल में गन्ना उत्पादकों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मां महामाया शक्कर कारखाने की स्थापना की गई थी। इसका उद्देश्य स्थानीय किसानों को उनकी उपज के लिए बाजार उपलब्ध कराना और कृषि आधारित उद्योगों को प्रोत्साहित करना था। उन्होंने कारखाने के आधुनिकीकरण और उत्पादन से जुड़े मूल्य संवर्धन पर भी जोर दिया।

गन्ना किसानों के लिए हाल में घोषित बोनस व्यवस्था के तहत 425 रुपये प्रति क्विंटल को गणना का आधार बनाया गया है। पेराई सत्र 2025-26 के लिए घोषित व्यवस्था में 329.05 रुपये प्रति क्विंटल के उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) और 425 रुपये के अंतर के आधार पर 95.95 रुपये प्रति क्विंटल बोनस की गणना की गई है। इससे गन्ना उत्पादकों को अतिरिक्त आर्थिक सहायता मिलने की उम्मीद है।

अन्य फसल की खेतीअपनाने के लिए भी प्रेरित

कृषि मंत्री ने कार्यक्रम में किसानों को धान के साथ दलहन और तिलहन जैसी वैकल्पिक फसलों की खेती अपनाने के लिए भी प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि धान के स्थान पर निर्धारित वैकल्पिक फसलों की खेती करने वाले पात्र किसानों को शासन के प्रावधानों के अनुसार 15 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। उन्होंने कहा कि फसल विविधीकरण से किसानों की आय के नए अवसर विकसित हो सकते हैं और खेती में जोखिम भी कम किया जा सकता है।

नेताम ने किसानों से जैविक और प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तकनीकों तथा कृषि विशेषज्ञों के मार्गदर्शन का उपयोग कर किसान कम पानी और संतुलित उर्वरकों के इस्तेमाल से बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। रासायनिक कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से स्वास्थ्य और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों को देखते हुए उन्होंने टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।

कार्यक्रम में प्रतापपुर विधायक शकुंतला पोर्ते ने गन्ना किसानों के हित में उठाए गए कदमों की सराहना की। उन्होंने कहा कि शक्कर कारखाने के विकास से क्षेत्र के किसानों को लाभ मिल रहा है और सरकार उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत बनाने के लिए प्रयासरत है। सूरजपुर कलेक्टर रेना जमील ने बताया कि रिवॉल्विंग फंड की घोषणा से किसानों में उत्साह है। आगामी कार्ययोजना के तहत शक्कर कारखाने की रिकवरी दर बढ़ाने और गन्ने की खेती का रकबा विस्तार करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इससे कारखाने की उत्पादन क्षमता बढ़ाने में सहायता मिलेगी।

कृषक चौपाल के दौरान किसानों ने अपनी समस्याएं और सुझाव भी कृषि मंत्री के सामने रखे। मंत्री ने उनकी बातें सुनीं और कृषि सुविधाओं के विस्तार को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष चंद्रमणि पैकरा, अपर कलेक्टर नयनतारा सिंह तोमर, एसडीएम रमेश मोर, कृषि अधिकारी सम्पदा पैकरा सहित जनप्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी और बड़ी संख्या में गन्ना उत्पादक किसान उपस्थित रहे।