June 15, 2026

भारत-फ्रांस परमाणु साझेदारी: छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMR) पर पीएम मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों की हुई अहम चर्चा

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भारत-फ्रांस परमाणु साझेदारी: छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMR) पर पीएम मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों की हुई अहम चर्चा

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को नई ऊंचाई पर ले जाने को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा हुई है। फ्रांस यात्रा के दौरान दोनों नेताओं ने मुख्य रूप से छोटे और एडवांस्ड मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) जैसी आधुनिक परमाणु तकनीक पर साझेदारी बढ़ाने पर जोर दिया है।

भविष्य की ऊर्जा तकनीक पर ध्यान

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों ने माना कि आने वाले समय में वैश्विक ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में परमाणु ऊर्जा एक आधारभूत स्तंभ होगी। दोनों नेताओं के बीच छोटे और उन्नत परमाणु रिएक्टरों (SMR) के विकास, उनके निर्माण और तकनीकी साझेदारी को लेकर गहन विचार-विमर्श हुआ।

विशेषज्ञों के अनुसार, SMR तकनीक भविष्य में ऊर्जा उत्पादन को न केवल अधिक सुरक्षित और सस्ता बनाएगी, बल्कि यह पर्यावरण के अनुकूल (Environment Friendly) होने के कारण कार्बन उत्सर्जन कम करने में भी क्रांतिकारी भूमिका निभाएगी।

फ्रांसीसी कंपनियों को भारत का निमंत्रण

प्रधानमंत्री मोदी की नीस यात्रा के दौरान विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने एक विशेष ब्रीफिंग में महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि:

* भारत ने फ्रांसीसी परमाणु कंपनियों को अपने ऊर्जा क्षेत्र में सीधे निवेश और भागीदारी के लिए आमंत्रित किया है।

* इस सहयोग को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए ‘SHANTI Act’ के तहत एक नया ढांचा प्रस्तावित किया गया है।

* यह कदम भारत की अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने और अत्याधुनिक तकनीक को देश में लाने की नई नीति का हिस्सा है।

रणनीतिक और आर्थिक लाभ

फ्रांस पहले से ही परमाणु ऊर्जा तकनीक के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी है। भारत के साथ उसकी यह साझेदारी न केवल ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करेगी, बल्कि जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने में भी दोनों देशों को रणनीतिक बढ़त दिलाएगी।

बैठक के दौरान ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और स्थिर ऊर्जा आपूर्ति जैसे दीर्घकालिक मुद्दों पर भी चर्चा की गई। दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक समस्याओं के समाधान के लिए देशों के बीच भरोसा और तकनीकी सहयोग सबसे महत्वपूर्ण है।