नवरात्र का अनोखा गीत : तोर देवाला शीतला दाई
HIRESH SINHA VOICE 36 GARH…..
अनोखी पहल : गीतों के माध्यम से समाज में चेतना का संचार
इतेश सोनी रायपुर- छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरा से लोकगायक हिरेश सिन्हा और जितेश्वरी सिन्हा निरंतर ऐसे गीत प्रस्तुत कर रहे हैं जो केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज को नई दिशा और चेतना भी प्रदान कर रहे हैं।
बलि प्रथा पर करारा प्रहार
तोला का बलि में देवव दाई गीत के माध्यम से उपनिषदों के प्रमाण देकर बेजुबान प्राणियों की रक्षा का संदेश दिया गया। इस गीत की गूंज इतनी व्यापक हुई कि अनेक मंदिरों में बलि प्रथा पर रोक लगी और हजारों लोगों ने मांसाहार छोड़कर करुणा का मार्ग अपनाया।
बेटियों की रक्षा और निसंतान दंपत्तियों का समाधान
गीत: बेटी बनके आबे
गीत में यह भी बताया गया कि बेटियों की रक्षा करना हर समाज का धर्म है। वहीं जिन परिवारों को संतान नहीं है, उन्हें निराश होने के बजाय पेड़ लगाना चाहिए तथा अनाथ बच्चों को गोद लेकर जीवन को सार्थक बनाना चाहिए। यह मार्गदर्शन सीधे उपनिषदों के संदेश पर आधारित है।
दारू छोड़ने की प्रेरणा
गीत: मोर बर दारू छोड़ देना।
मोर बर दारू छोड़ देना गीत एक परिवार की सच्ची कहानी पर आधारित है। इस गीत से प्रेरित होकर असंख्य लोगों ने शराब जैसी सामाजिक बुराई को त्याग दिया। यह गीत प्रमाणित करता है कि संगीत और संस्कृति समाज परिवर्तन का सशक्त माध्यम हैं।
लोक संस्कृति का वैश्विक प्रचार
गीत: हम तो आदिवासी आन
हम तो आदिवासी आन गीत ने छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को न केवल प्रदेश और देश में, बल्कि विदेशों तक पहुँचाया। प्रवासी भारतीयों और अंतर्राष्ट्रीय श्रोताओं ने भी इसे अपनाया, जिससे छत्तीसगढ़ का मस्तक गर्व से ऊँचा हुआ।
सनातन धर्म की वास्तविक व्याख्या
हिरेश सिन्हा और जितेश्वरी सिन्हा केवल लोकगीत ही नहीं, बल्कि सनातन धर्म की असली परिभाषा भी जनता तक पहुँचा रहे हैं।
वे स्पष्ट करते हैं कि
मूर्ति पूजा का सार
मंदिर जाने का कारण
दीप क्यों जलाते हैं
आरती क्यों करते हैं
फूल क्यों चढ़ाते हैं
धर्म का वास्तविक अर्थ : धर्म केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि सत्य, करुणा, कर्तव्य और मानवता की रक्षा है।
इस प्रकार उपनिषदों से प्रमाण देकर वे समाज की शंकाओं और भ्रमों का निवारण कर लोगों को सत्य से जोड़ रहे हैं।
नवरात्र का अनोखा गीत : तोर देवाला शीतला दाई
इस नवरात्रि पर हिरेश सिन्हा और जितेश्वरी सिन्हा लेकर आ रहे हैं विशेष गीत
तोर देवाला शीतला दाई
इस गीत में माँ दुर्गा के नौ रूपों का वर्णन किया गया है। गीत यह भी बताता है कि माँ दुर्गा को नौ अवतार क्यों धारण करने पड़े और किस प्रकार उन्होंने विभिन्न रूपों में अधर्म का संहार कर धर्म की स्थापना की।
यह संभवतः छत्तीसगढ़ के इतिहास का पहला गीत होगा जो नौ देवियों के स्वरूप और शक्ति को संपूर्णता के साथ प्रस्तुत करता है। यह केवल संगीत ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक धरोहर को पुनर्जीवित करने का कार्य करेगा।
गीत की प्रमुख जानकारी
गीत : जितेश्वरी सिन्हा
आवाज़ : हिरेश सिन्हा
संगीत : सूरज महानंद
निर्माण : सागर फिल्म प्रोडक्शन
प्रस्तुति : HIRESH SINHA VOICE 36 GARH
हिरेश सिन्हा और जितेश्वरी सिन्हा के ये प्रयास सिद्ध कर रहे हैं कि अगर कला और संस्कृति का उपयोग सही दिशा में हो, तो वह समाज और राष्ट्र के उत्थान का सबसे प्रभावी माध्यम बन सकती है।
