जिले में उचित मूल्य की दुकानों पर मचा हाहाकार — नई मशीनों से रुक रहा राशन वितरण, ग्रामीण हो रहे परेशान
इतेश सोनी गरियाबंद, छत्तीसगढ़। भारतीय जनता पार्टी के शासनकाल में गरियाबंद जिले के ग्रामीण इन दिनों अन्न के एक-एक दाने के लिए तरस रहे हैं। जिले की अधिकतर (सार्वजनिक वितरण प्रणाली) की उचित मूल्य दुकानों में नई मशीनों के माध्यम से राशन वितरण प्रक्रिया इतनी धीमी हो गई है कि उपभोक्ताओं को अपने हिस्से का राशन पाने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ रही है।
सूत्रों के अनुसार, एक व्यक्ति को मशीन के माध्यम से राशन प्राप्त करने में लगभग 30 से 35 मिनट का समय लग रहा है। ऐसे में एक दिन में एक सोसाइटी में अधिकतम 25 उपभोक्ताओं को ही राशन दिया जा पा रहा है। जून माह समाप्त होने को है लेकिन अब तक केवल 20 प्रतिशत ग्रामीणों को ही चावल और अन्य आवश्यक राशन मिल पाया है। 80 प्रतिशत से अधिक ग्रामीण अब भी अपने हिस्से के राशन के इंतजार में हैं।
ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। उन्होंने बताया कि वे रोज़ाना अपना काम-धंधा छोड़कर सुबह से शाम तक राशन की दुकानों में बैठे रहते हैं, लेकिन फिर भी उनका नंबर नहीं आता। यह स्थिति खासतौर पर दिहाड़ी मजदूर वर्ग के लिए संकट बन चुकी है, जो प्रतिदिन कमाकर ही अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं।
सर्वर समस्या और मशीन की धीमी प्रक्रिया भी इस समस्या का एक बड़ा कारण है। एक उचित मूल्य दुकान के सेल्समैन ने बताया कि नई मशीनें ठीक से काम नहीं कर रहीं और सर्वर की समस्या लगातार बनी हुई है, जिससे वितरण में अत्यधिक विलंब हो रहा है।
जब इस विषय पर जिला खाद्य अधिकारी से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं दी।
ग्रामीणों की मांग है कि शासन इस मामले पर शीघ्र संज्ञान ले और वैकल्पिक या त्वरित समाधान प्रस्तुत करे, ताकि सभी उपभोक्ताओं को इस महीने का राशन सही समय पर मिल सके। इसके साथ ही ग्रामीणों का यह भी कहना है कि यदि कोई उपभोक्ता इस बार राशन नहीं ले पाया तो उसका हक़ अगले महीने लैप्स नहीं होना चाहिए।
यदि प्रशासन ने इस समस्या को गंभीरता से नहीं लिया तो यह असंतोष जल्द ही विरोध और आंदोलन का रूप ले सकता है।
