सनी देओल की फिल्म ‘सूर्या: अंत से आरंभ तक’ रिलीज से पहले विवादों में: छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी ने NMC को भेजा कानूनी नोटिस
रायपुर : बॉलीवुड अभिनेता सनी देओल की आगामी फिल्म ‘सूर्या: अंत से आरंभ तक’ रिलीज से पहले ही विवादों में घिर गई है। फिल्म के टीजर और प्रमोशनल कंटेंट में डॉक्टरों के चित्रण को लेकर छत्तीसगढ़ में विरोध शुरू हो गया है। छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी ने फिल्म के कुछ दृश्यों पर गंभीर आपत्ति जताते हुए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) को कानूनी नोटिस भेजा है।
सोसायटी का आरोप है कि फिल्म के प्रचार में मेडिकल पेशे को नकारात्मक रूप में दिखाया गया है और कुछ दृश्य स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देने वाले प्रतीत होते हैं। सनी देओल की यह एक्शन और क्राइम थ्रिलर फिल्म 20 नवंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए प्रस्तावित है। फिल्म का टीजर 19 अक्टूबर को जारी किया गया था। इसमें सनी देओल एक ऐसे व्यक्ति की भूमिका में नजर आ रहे हैं, जो निजी जिंदगी में हुई एक दुखद घटना के बाद व्यवस्था से सवाल करता है। हालांकि, रिलीज से पहले फिल्म की कहानी और संवादों को लेकर चिकित्सा जगत के एक वर्ग ने आपत्ति दर्ज कराई है।
छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के चेयरमैन डॉ. अभिजात चंद्रकांत शेठ और सचिव डॉ. राघव लैंगर को कानूनी नोटिस भेजकर डॉक्टरों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे उठाए हैं। सोसायटी के संयोजक डॉ. कुलदीप सोलंकी का कहना है कि देश में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार तथा हिंसा की घटनाएं चिंता का विषय हैं।
ऐसे में फिल्मों और उनके प्रचार में स्वास्थ्यकर्मियों के विरुद्ध हिंसा का चित्रण संवेदनशीलता के साथ किया जाना चाहिए। सोसायटी का आरोप है कि फिल्म के प्रमोशनल कंटेंट में डॉक्टरों को भ्रष्ट और अनैतिक दिखाने की कोशिश की गई है। इसके अलावा डॉक्टरों के खिलाफ अभद्र भाषा और हिंसक दृश्यों पर भी आपत्ति जताई गई है।
सोसायटी का कहना है कि इस प्रकार के चित्रण से दर्शकों के बीच चिकित्सा पेशे के प्रति अविश्वास बढ़ सकता है। हालांकि, ये आरोप फिल्म के प्रचार में सामने आई सामग्री के आधार पर लगाए गए हैं। फिल्म की पूरी कहानी और उसका अंतिम स्वरूप सामने आने के बाद ही उसके समग्र चित्रण का आकलन संभव होगा।
छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी ने नोटिस में दो प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली मांग यह है कि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा और दुर्व्यवहार रोकने के लिए केंद्र सरकार तथा संबंधित मंत्रालयों को प्रभावी एडवाइजरी जारी करने की पहल करे। दूसरी मांग फिल्म के आपत्तिजनक बताए जा रहे दृश्यों और प्रचार सामग्री की नियमानुसार समीक्षा कराने की है।
सोसायटी ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) से संबंधित सामग्री पर उचित कार्रवाई की मांग भी उठाई है। डॉ. कुलदीप सोलंकी ने कहा है कि यदि संबंधित संस्थाओं की ओर से संतोषजनक कदम नहीं उठाए जाते हैं, तो सोसायटी न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकती है। साथ ही नोटिस पर जवाब और अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी भी मांगी गई है
इस बीच फिल्म को लेकर विवाद दिल्ली हाईकोर्ट भी पहुंच चुका है। चार डॉक्टरों की ओर से दाखिल एक अलग याचिका पर 2 नवंबर को दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, सीबीएफसी और फिल्म निर्माताओं सहित संबंधित पक्षों से जवाब मांगा। याचिका में आरोप लगाया गया है कि फिल्म का टीजर निजी अस्पतालों के डॉक्टरों की नकारात्मक छवि प्रस्तुत करता है और स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ हिंसा को उचित ठहराने जैसा संदेश देता है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 नवंबर की तारीख तय की है। याचिकाकर्ताओं ने टीजर के प्रदर्शन पर रोक लगाने का अनुरोध किया था, लेकिन 2 नवंबर की सुनवाई में अदालत ने ऐसी कोई रोक नहीं लगाई। फिल्म के खिलाफ विरोध केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने भी फिल्म के प्रचार में डॉक्टरों के चित्रण को लेकर आपत्ति जताई है। एसोसिएशन ने संबंधित मंत्रालय से फिल्म की निष्पक्ष समीक्षा और आवश्यक सुधार की मांग की है।
फिल्म का निर्देशन एम. पद्मकुमार ने किया है। इसमें सनी देओल के साथ रवि किशन, प्रज्ञा जायसवाल, टीनू आनंद और अन्य कलाकार महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं। निर्माताओं ने फिल्म को एक क्राइम थ्रिलर के रूप में प्रस्तुत किया है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या फिल्म के आपत्तिजनक बताए जा रहे दृश्यों में बदलाव होगा या निर्माता निर्धारित तारीख पर ही फिल्म रिलीज कर पाएंगे। अब सबकी नजर दिल्ली हाईकोर्ट की अगली सुनवाई और संबंधित नियामक संस्थाओं के निर्णय पर है। महत्वपूर्ण बात यह है कि अभी फिल्म पर प्रतिबंध लगाए जाने की पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल बैन और बदलाव की मांग की गई है तथा मामला न्यायिक प्रक्रिया में है।
