September 29, 2026

अमेरिका से रिश्तों पर एस जयशंकर की दो टूक, बोले- आतंकवाद की गंभीरता नहीं समझी तो पड़ेगा असर

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दिल्ली: न्यूयॉर्क में एशिया सोसाइटी के एक कार्यक्रम में जयशंकर ने कहा कि भारत लंबे समय से पड़ोसी देश की ओर से होने वाले आतंकवाद का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत के लिए यह एक गंभीर चिंता का विषय है। जयशंकर के मुताबिक, अगर अमेरिका इस समस्या की गंभीरता को नहीं समझता है, तो इसका असर भारत-अमेरिका के रिश्तों पर भी दिखाई दे सकता है। उन्होंने यह बात दोनों देशों के संबंधों को लेकर चर्चा के दौरान कही।

टैरिफ विवाद पर बोले- अमेरिका से रिश्ते आसान नहीं रहे

कार्यक्रम में पूर्व अमेरिकी राजनयिक डेनियल रसेल ने जयशंकर से व्यापार और टैरिफ के मुद्दे पर सवाल किया। उनसे पूछा गया कि पिछले एक साल में भारत और अमेरिका के रिश्तों में आई खटास को किस तरह कम किया जा सकता है।

इसके जवाब में जयशंकर ने कहा कि अमेरिका के साथ संबंध अब केवल भारत के लिए ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों के लिए पहले की तुलना में अधिक मुश्किल हो गए हैं। उन्होंने इसे मौजूदा स्थिति की वास्तविकता बताया।

अमेरिका-चीन रिश्तों पर जयशंकर की टिप्पणी

जयशंकर ने अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पहले अमेरिका में भारत की विदेश नीति को लेकर सवाल उठाए जाते थे। भारत से अपेक्षा की जाती थी कि वह अपने संबंधों में अमेरिका को अधिक महत्व दे और उसके पास बहुत ज्यादा विकल्प न हों।

जयशंकर के मुताबिक, अब अमेरिका खुद एक साथ एशिया के दूसरे देशों के साथ संबंधों को संभाल रहा है। उन्होंने कहा कि जिस तरह की नीति को लेकर पहले भारत से सवाल किए जाते थे, अब अमेरिका भी उसी तरह कई देशों के साथ अपने रिश्ते बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।

निया बढ़ रही बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर

विदेश मंत्री ने कहा कि दुनिया अब ऐसे दौर में पहुंच रही है, जहां देश केवल किसी एक ताकत पर निर्भर रहने के बजाय कई देशों के साथ संबंध बना रहे हैं। उनके अनुसार, यही बदलाव दुनिया को बहुध्रुवीय व्यवस्था की दिशा में ले जा रहा है।

जयशंकर ने इसे समझाने के लिए मजाकिया अंदाज में ‘च्यूइंग गम’ का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि अब यह च्यूइंग गम सभी के पास होगा और हर देश इसका इस्तेमाल अपने तरीके से करेगा।

उन्होंने कहा कि यह बदलाव पसंद आए या नहीं, लेकिन जब अमेरिका जैसी बड़ी ताकत इस तरीके से काम करती है तो उसका प्रभाव पूरी दुनिया पर पड़ता है और यह एक वैश्विक रुझान बन जाता है।

चीन के साथ रिश्तों में सुधार, लेकिन चुनौतियां बरकरार

जयशंकर ने भारत और चीन के संबंधों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते पिछले कुछ समय की तुलना में बेहतर हुए हैं। 2020 में सीमा पर तनाव के बाद संबंधों में काफी खराब स्थिति बनी थी, लेकिन अब सीमा पर हालात सामान्य होने के साथ रिश्तों में भी धीरे-धीरे सुधार आया है

हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच सभी समस्याएं समाप्त नहीं हुई हैं। जयशंकर ने कहा कि 2024-2025 की तुलना में मौजूदा स्थिति बेहतर है और सीमा पर जैसे हालात होंगे, दोनों देशों के संबंध भी उसी के अनुसार प्रभावित होंगे।

उन्होंने कहा कि भारत और चीन के बीच लंबे समय तक तनाव बने रहना दोनों देशों के हित में नहीं है। ऐसी स्थिति में फंसे रहना भी उचित नहीं है, जिससे किसी दूसरे देश को फायदा मिल सके।

युद्ध, आर्थिक दबाव और सप्लाई चेन ने बढ़ाई चुनौती

जयशंकर ने मौजूदा वैश्विक व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध चल रहे हैं। इसके अलावा आर्थिक दबाव और व्यापार को राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने की कोशिशों ने परिस्थितियों को और अस्थिर बनाया है।

उन्होंने कहा कि वैश्विक सप्लाई चेन भी पहले की तुलना में अधिक असुरक्षित हो गई है। उनके मुताबिक, भोजन, ईंधन, खाद और पैसों से जुड़ा ‘4F संकट’ दुनिया के सामने बड़ी चुनौती है।

जयशंकर ने कहा कि जब कोई देश किसी जरूरी वस्तु के लिए दूसरे देश पर बहुत अधिक निर्भर होता है, तो दूसरा देश उस निर्भरता का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए कर सकता है। इसी बदलते वैश्विक माहौल को देखते हुए जयशंकर ने कहा कि कूटनीति अब पहले से ज्यादा कठिन हो गई है।

राजनयिकों को जोखिम भरे फैसले लेने के साथ पुराने विवादों को भी संभालना पड़ता है। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि आज के दौर में “कूटनीति एक एक्सट्रीम स्पोर्ट बन गई है।”