बलौदाबाजार-भाटापारा: खर्वे गांव में जहरीली शराब से 8 मौतों का मामला, जांच के लिए कब्र से निकाला गया शव
बलौदाबाजार-भाटापारा: खर्वे गांव में जहरीली शराब से 8 मौतों का मामला, जांच के लिए कब्र से निकाला गया शव
बलौदाबाजार-भाटापारा: जिले के कसडोल क्षेत्र के खर्वे गांव में कथित जहरीली शराब पीने से 8 ग्रामीणों की संदिग्ध मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। आक्रोशित ग्रामीणों की मांग और बढ़ते दबाव के बाद, शनिवार को प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फॉरेंसिक जांच की प्रक्रिया तेज कर दी है।
कब्र खोदकर निकाला गया शव, फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा रायपुर
जांच प्रक्रिया के तहत, शनिवार को पुलिस, राजस्व विभाग और एफएसएल (FSL) की टीम खर्वे गांव पहुंची। प्रशासन की मौजूदगी में जेसीबी की मदद से एक मृतक, मैत्रु साहू, का शव कब्र से बाहर निकाला गया। कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद शव और संबंधित सैंपलों को विस्तृत जांच के लिए रायपुर भेजा गया है। अधिकारियों का कहना है कि फॉरेंसिक रिपोर्ट के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो पाएगा। जरूरत पड़ने पर अन्य मृतकों के शवों की भी जांच की जा सकती है।
क्या है पूरा मामला?
संदिग्ध मौतें: पिछले कुछ दिनों के भीतर गांव में 8 लोगों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई है।
ग्रामीणों का आरोप: परिजनों का दावा है कि सभी मृतकों ने एक ही स्रोत से शराब का सेवन किया था। शराब पीने के मात्र 10 से 15 मिनट बाद ही उनकी तबीयत बिगड़ी और मौत हो गई।
आशंका: ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि शराब में जानबूझकर कोई जहरीला पदार्थ मिलाया गया था।
जन-आक्रोश: घटना से नाराज ग्रामीणों ने कुछ दिन पहले कसडोल थाने का घेराव कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी।
प्रशासन का रुख
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जा रही है। अधिकारियों ने कहा:
“सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच की जा रही है। ग्रामीणों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और साक्ष्य एकत्रित किए जा रहे हैं। फॉरेंसिक रिपोर्ट आते ही दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”
गांव में पसरा है सन्नाटा और दहशत
लगातार 8 मौतों से पूरे खर्वे गांव में दहशत का माहौल है। हालांकि प्रशासन ने अभी तक शराब में जहर मिलाने के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन ग्रामीणों का डर और गुस्सा लगातार बना हुआ है। अब पूरे क्षेत्र की निगाहें फॉरेंसिक रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह साफ हो सकेगा कि इन असमय हुई मौतों के पीछे की हकीकत क्या है।
