एयरपोर्ट पर ₹4 करोड़ की ड्रग्स के साथ व्यक्ति गिरफ्तार
एयरपोर्ट पर ₹4 करोड़ की ड्रग्स के साथ व्यक्ति गिरफ्तार
महाराष्ट्र: मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (CSMIA) पर कस्टम अधिकारियों ने ड्रग्स तस्करी के एक मामले का खुलासा करते हुए 49 वर्षीय एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर आरोप है कि वह बैंकॉक से विटामिन C के पैकेटों में छिपाकर नशीले पदार्थ भारत ला रहा था।
कस्टम सूत्रों के अनुसार, रविवार को ठाणे निवासी H.S. Nullwala नामक यात्री को ‘स्पॉट प्रोफाइलिंग’ के आधार पर रोका गया। यह यात्री बैंकॉक होते हुए कोलंबो से मुंबई पहुंचा था। अधिकारियों ने उसे एयरपोर्ट के अराइवल हॉल के एग्जिट गेट के पास जांच के लिए रोका।
शुरुआती पूछताछ के बाद यात्री के सामान की गहन तलाशी ली गई। जांच के दौरान बैग में रखे कपड़ों के बीच से विटामिन C के आठ पैकेट बरामद किए गए। इन पैकेटों को सामान्य स्वास्थ्य सप्लीमेंट जैसा दिखाकर छिपाने की कोशिश की गई थी।
लेकिन कस्टम अधिकारियों को संदेह होने पर जब पैकेटों को खोला गया, तो अंदर से कथित तौर पर नशीले पदार्थ बरामद हुए। अधिकारियों के अनुसार, यह ड्रग्स विशेष तरीके से पैक किए गए थे ताकि सुरक्षा जांच में आसानी से पकड़े न जा सकें।
इस बरामदगी के बाद यात्री को तुरंत हिरासत में ले लिया गया और उससे पूछताछ शुरू की गई। कस्टम विभाग अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि इस तस्करी के पीछे कौन सा अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क सक्रिय है और क्या आरोपी अकेले काम कर रहा था या किसी बड़े गिरोह का हिस्सा है।
अधिकारियों ने बताया कि एयरपोर्ट पर बढ़ी हुई निगरानी और प्रोफाइलिंग तकनीक के चलते इस तरह के मामलों का खुलासा करना संभव हो पा रहा है। यह मामला भी इसी सतर्कता का परिणाम है।
फिलहाल आरोपी को आगे की जांच के लिए संबंधित एजेंसियों के हवाले कर दिया गया है। उसके यात्रा रिकॉर्ड, संपर्कों और बैंकॉक में उसके ठहराव की भी जांच की जा रही है ताकि पूरे तस्करी नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।
कस्टम विभाग ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के जरिए ड्रग्स की तस्करी के मामलों पर लगातार नजर रखी जा रही है और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जा रही है।
कुल मिलाकर, मुंबई एयरपोर्ट पर हुई यह कार्रवाई एक बार फिर दिखाती है कि किस तरह तस्कर नए तरीकों का इस्तेमाल कर सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देने की कोशिश करते हैं, लेकिन सतर्कता और तकनीकी निगरानी के चलते ऐसे प्रयासों को नाकाम किया जा रहा है।
