सच्चे प्रेम और भाव के भूखे हैं भगवान – पं० गौरव जोशी
सच्चे प्रेम और भाव के भूखे हैं भगवान – पं० गौरव जोशी
कृष्ण-सुदामा के मिलन पर छलके श्रोताओं के आंसू
अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
जांजगीर चाम्पा – जिले के समीपस्थ ग्राम भड़ेसर में उपाध्याय परिवार द्वारा श्रीमति हेमनलिनी / नर्मदा प्रसाद उपाध्याय की स्मृति में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ के सातवें और अंतिम दिन श्रद्धा , प्रेम और वैराग्य की अविरल धारा बही। कथा व्यास पूज्य महाराज गौरव जोशी जी (नगोई वाले) के मुखारविंद से सुदामा चरित्र और परीक्षित मोक्ष का प्रसंग सुनकर पूरा पंडाल भावुक हो उठा। कथा के विश्राम दिवस पर महाराजश्री ने सुदामा चरित्र का अत्यंत मार्मिक और हृदयस्पर्शी वर्णन किया।
उन्होंने बताया कि सुदामाजी केवल एक गरीब ब्राह्मण नहीं , बल्कि ब्रह्मज्ञानी और भगवान के परम सखा थे। पत्नी सुशीला के आग्रह पर जब सुदामाजी द्वारिकाधीश से मिलने पहुंचे , तो उनकी दीन दशा देखकर स्वयं त्रिलोकीनाथ भगवान श्री कृष्ण फूट-फूट कर रो पड़े। “देखि सुदामा की दीन दशा , करुना करिके करुनानिधि रोये…” महाराजजी ने जब इन पंक्तियों का गायन किया , तो उपस्थित सैकड़ों श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। इस प्रसंग को जीवंत रूप देने के लिये मंच पर कृष्ण-सुदामा मिलन की एक अत्यंत मार्मिक और भव्य झांकी प्रस्तुत की गई।
फटे हुए वस्त्रों में सुदामा जी का द्वारिका पहुंचना , द्वारपालों से विनती करना और खबर सुनते ही भगवान श्री कृष्ण का नंगे पांव दौड़ते हुये आना—इस दृश्य ने सभी को रुला दिया। मंच पर जब भगवान ने अपने सखा को गले लगाया और आंसुओं से उनके चरण धोये , तब पंडाल में “अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो…” भजन पर भक्त भाव-विभोर होकर झूम उठे। भगवान ने सुदामा के लाये सूखे पोहे (चांवल) को बड़े प्रेम से खाकर यह संदेश दिया कि परमात्मा केवल सच्चे प्रेम और भाव के भूखे हैं , धन-दौलत के नहीं। सुदामा चरित्र के पश्चात महाराजजी ने राजा परीक्षित के मोक्ष की कथा सुनाई।
उन्होंने बताया कि कैसे शुकदेवजी के श्रीमुख से सात दिनों तक भागवत कथा सुनने के बाद राजा परीक्षित का मृत्यु से भय समाप्त हो गया और तक्षक नाग के डसने पर भी उन्हें परम पद (मोक्ष) की प्राप्ति हुई। कथा का सार बताते हुये कथाव्यास गौरव जोशी ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा जीवन जीने की कला और मृत्यु को सुधारने का मार्ग सिखाती है। कथा के अंतिम चरण में शुकदेवजी की विदाई और भागवत भगवान की आरती संपन्न हुई। यजमान उपाध्याय परिवार ने व्यास पीठ और पोथी (ग्रंथ) का विधि-विधान से पूजन किया। उपाध्याय परिवार ने इस पुनीत कार्य में सहयोग देने वाले सभी प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष सहयोगियों और ग्रामवासियों का हृदय से आभार व्यक्त किया।
