9 या 10 नवंबर, कब है अक्षय नवमी? नोट करें शुभ योग ,पूजा विधि और महत्व
हर साल अक्षय नवमी कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाई जाती है। इस शुभ दिन पर आंवले के पेड़ की पूजा की जाती है। आंवले के पेड़ के नीचे भोजन भी बनाया जाता है। इस भोजन को सबसे पहले भगवान विष्णु और महादेव को अर्पित किया जाता है। सनातन धर्मग्रंथों से पता चलता है कि लक्ष्मी जी ने सबसे पहले आंवले के पेड़ की पूजा की थी। पेड़ के नीचे भोजन बनाकर उन्होंने भगवान विष्णु और महादेव को खिलाया। तब से हर साल कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की नवमी को अक्षय नवमी मनाई जाती है। इस शुभ दिन पर आंवले के पेड़ की पूजा करने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। आइए जानते हैं शुभ मुहूर्त और शुभ योग ।
अक्षय नवमी शुभ योग
ज्योतिषियों की मानें तो आंवला नवमी पर दुर्लभ ध्रुव योग का निर्माण हो रहा है। इस योग का संयोग 11 नवंबर देर रात 01 बजकर 42 मिनट तक है। साधक प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के बाद विधिपूर्वक आंवला पेड़ की पूजा कर सकते हैं। इस शुभ अवसर पर रवि योग का भी निर्माण हो रहा है। इसके अलावा, नवमी तिथि तक दुर्लभ शिववास योग का संयोग बन रहा है। इन योग में आंवला पेड़ की पूजा करने से सुख और सौभाग्य में वृद्धि होगी।
अक्षय नवमी की पूजा विधि
- प्रातः काल जल्दी उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लें।
- इसके बाद आंवले के वृक्ष पर गंगाजल चढ़ाएं और रोली, चंदन, पुष्प आदि से श्रृंगार करें।
इसके बाद आंवले के पेड़ के नीचे घी का दीया जलाएं। - अब पेड़ की सात बार परिक्रमा करें।
- परिक्रमा के बाद आंवले के पेड़ के नीचे फल, मिठाई आदि का नैवेद्य अर्पित करें।
- अक्षय नवमी के दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है, इसलिए उनकी भी पूजा अर्चना करें।
- मंत्र जाप के दौरान “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।
- संभव हो तो अपनी क्षमता अनुसार किसी जरूरतमंद को भोजन, वस्त्र आदि दान कर सकते हैं।
- शाम को पूजा के बाद सुख-समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना करें और व्रत का पारण करें।
अक्षय नवमी की पूजा विधि
धार्मिक ग्रंथों में आंवले को पवित्र माना गया है। इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में सुख, समृद्धि और शांति आती है। इस दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। इस विशेष दिन पर, भक्त आंवले के पेड़ के नीचे बैठते हैं और भक्तिपूर्वक प्रार्थना करते हैं। अक्षय नवमी पर पितरों का श्राद्ध और तर्पण भी किया जाता है। नई शुरुआत के लिए भी यह दिन अनुकूल माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, व्यवसाय में निवेश करने या नई योजनाएं शुरू करने के लिए यह अनुकूल समय है।
