October 22, 2026

जंतर-मंतर हिंसा: पीड़ितों और प्रभावित पुलिसकर्मियों के लिए शिकायत पोर्टल शुरू; गोपनीय रखी जा सकेगी गवाहों की पहचान

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नई दिल्ली: जुलाई 2026 में दिल्ली के जंतर-मंतर और राजधानी से बाहर अन्य स्थानों पर हुई हिंसा की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित उच्चाधिकार प्राप्त जांच समिति ने शिकायत पोर्टल शुरू किया है। इस सुविधा के माध्यम से प्रभावित नागरिक, घटनाओं से जुड़े अन्य पक्ष और प्रभावित पुलिसकर्मी अपनी शिकायतें तथा अभ्यावेदन जमा कर सकते हैं। गृह मंत्रालय ने शनिवार, 17 अक्टूबर को इसकी जानकारी दी। पोर्टल का उद्देश्य संबंधित लोगों को समिति के सामने अपनी बात रखने और जांच से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने का माध्यम देना है।

उच्चाधिकार प्राप्त जांच समिति, यानी एचपीईसी, का गठन हिंसा से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल के लिए किया गया था। समिति का जांच क्षेत्र सुप्रीम कोर्ट के आदेशों से निर्धारित है। इसमें 18 अगस्त, 2026 के आदेश के अनुच्छेद 12 और 13 तथा 10 सितंबर, 2026 के आदेश के अनुच्छेद 5(i) में बताए गए मुद्दे शामिल हैं। शिकायतें और जानकारी इन्हीं संदर्भित विषयों से संबंधित होनी चाहिए। नई व्यवस्था के तहत प्रभावित लोगों को निर्धारित प्रारूपों का इस्तेमाल करते हुए अपनी शिकायत या अभ्यावेदन अपलोड करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।

समिति कुछ गंभीर विषयों को प्राथमिकता देगी। इनमें पेलेट गन के इस्तेमाल से संबंधित मामले, लक्षित हिंसा और महिला प्रदर्शनकारियों के उत्पीड़न की शिकायतें शामिल हैं। इसके अलावा किसी भी पक्ष की ओर से अत्यधिक हिंसा और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से जुड़े मामलों पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। इस प्रकार जांच में प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों सहित अलग-अलग प्रभावित पक्षों के विवरण सामने आ सकेंगे। शिकायतों के लिए शुरू की गई सुविधा केवल किसी एक पक्ष तक सीमित नहीं रखी गई है।

पोर्टल की महत्वपूर्ण विशेषता गवाहों और प्रभावित लोगों की गोपनीयता से संबंधित है। गृह मंत्रालय के अनुसार, इसे इस तरह तैयार किया गया है कि संवेदनशील परिस्थितियों वाले गवाहों की उचित सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिल सके। प्रभावित व्यक्ति चाहें तो उनकी पहचान गोपनीय और अप्रकट रखी जा सकती है। यह व्यवस्था उन लोगों के लिए विशेष महत्व रखती है, जो अपनी पहचान सार्वजनिक होने की चिंता के कारण घटनाओं का विवरण सामने रखने में संकोच कर सकते हैं।

शिकायत दर्ज कराने की सुविधा के साथ अन्य संबंधित व्यक्तियों को भी जानकारी और सुझाव देने का अवसर मिलेगा। कोई व्यक्ति सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत समिति को सौंपे गए विषयों के बारे में प्रासंगिक जानकारी देना चाहता है तो वह भी पोर्टल का इस्तेमाल कर सकता है। इसका अर्थ है कि प्रक्रिया में केवल प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित लोग ही भाग नहीं ले सकते, बल्कि घटनाओं से जुड़ी जानकारी रखने वाले अन्य व्यक्ति भी अपना विवरण समिति तक पहुंचा सकते हैं।

ऑनलाइन माध्यम के अतिरिक्त शिकायत और संबंधित सामग्री व्यक्तिगत रूप से जमा करने का विकल्प भी दिया गया है। इसके लिए नई दिल्ली के राउज एवेन्यू इंस्टीट्यूशनल एरिया स्थित शिक्षा सदन, 17 में समिति के कार्यालय में संपर्क किया जा सकता है। कार्यालय में सभी कार्यदिवसों पर दोपहर दो बजे से शाम चार बजे के बीच शिकायतें, अभ्यावेदन और अन्य प्रासंगिक सामग्री स्वीकार की जाएगी। इससे ऑनलाइन सुविधा का उपयोग नहीं कर पाने वाले लोगों के लिए भी समिति तक अपनी बात पहुंचाने का रास्ता उपलब्ध रहेगा।

जो व्यक्ति कार्यालय नहीं पहुंच सकते, वे संबंधित पते पर डाक से भी सामग्री भेज सकते हैं। ईमेल के माध्यम से विवरण जमा करने की व्यवस्था भी की गई है। इस तरह ऑनलाइन पोर्टल, व्यक्तिगत उपस्थिति, डाक और ईमेल के विकल्प उपलब्ध कराए गए हैं। गृह मंत्रालय ने प्रभावित लोगों और अन्य हितधारकों से लागू प्रारूपों का उपयोग करने को कहा है। शिकायत देने वाले व्यक्तियों के लिए समिति के समक्ष संदर्भित मुद्दों के अनुसार अपनी बात रखना इस प्रक्रिया का प्रमुख हिस्सा होगा।

जुलाई में हुई घटनाओं के दौरान बल प्रयोग और हिंसा को लेकर विभिन्न आरोप सामने आए थे। अब समिति के सामने शिकायतें, अभ्यावेदन और जानकारी एकत्र करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। पोर्टल शुरू होने से प्रभावित पुलिसकर्मियों सहित संबंधित लोगों को घटनाओं का अपना विवरण देने का औपचारिक अवसर मिला है। समिति सुप्रीम कोर्ट के निर्धारित दायरे में इन विषयों की जांच करेगी। फिलहाल घोषित प्राथमिकताओं में गवाहों की सुरक्षा, पहचान की गोपनीयता और हिंसा के विभिन्न पहलुओं से संबंधित जानकारी प्राप्त करना प्रमुख है।