September 5, 2026

थदड़ी के महापर्व पर छत्तीसगढ़ी लोक गायिका आरू साहू के सुआ गीत पर सिंधी समाज की महिलाओं ने किया सुआ नाच

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रायपुर. सिंधु संस्कार सेवा समिति की महिला विंग द्वारा प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी थदड़ी महापर्व के अवसर पर एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन महादेव घाट, रायपुर में किया गया। कार्यक्रम माँ संतोषी माता मांदर वाली के पावन सानिध्य में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि सुप्रसिद्ध छत्तीसगढ़ी लोक गायिका सुश्री आरू साहू रहीं। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में समाजसेवी श्री अमरचंदानी जी, श्री मनीष पंजवानी एवं श्री देवानंद शर्मा जी मंच पर आसीन रहे।

सिंधी समाज के घरों में कल नहीं जला था चूल्हा: सिंधी समाज में थदड़ी पर्व का विशेष महत्व है। इस दिन शीतला सप्तमी के रूप में मनाया जाता है, जिसमें एक दिन पहले बना हुआ ठंडा भोजन ग्रहण किया जाता है और घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता। यह परंपरा माता शीतला को समर्पित है और परिवार की सुख-समृद्धि व स्वास्थ्य के लिए मनाई जाती है।

कार्यक्रम में विशेष रूप से प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की बहनों को आमंत्रित किया गया था, जिन्होंने ‘नशा मुक्त भारत’ के विषय पर अपने प्रेरणादायक विचार रखे। समिति द्वारा समाज में किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों हेतु समिति की अध्यक्ष श्रीमती डिंपल शर्मा को ब्रह्माकुमारी संस्था द्वारा सम्मान-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

अपने उद्बोधन में श्री अमरचंदानी जी ने कहा कि सिंधु संस्कार सेवा समिति निरंतर सामाजिक एवं सांस्कृतिक कार्यों के माध्यम से समाज को एक नई दिशा दे रही है, जिसकी पूरी टीम बधाई की पात्र है। श्री मनीष पंजवानी जी ने सभी को थदड़ी पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित कीं।

कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोह लिया। अनिल कृष्णानी एवं श्री ओम भाटिया द्वारा प्रस्तुत सिंधी गीतों पर महिलाएं झूम उठीं। थदड़ी के महापर्व पर छत्तीसगढ़ी लोक गायिका आरू साहू के सुआ गीत पर सिंधी समाज की महिलाओं ने जमकर सुआ नृत्य किया, जिसने कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिए। साथ ही नौका ज्वेलर्स द्वारा मनोरंजक खेलों का आयोजन किया गया जिसमें विजेता महिलाओं को पुरस्कृत किया गया।

कार्यक्रम में लगभग 200 महिलाओं की उपस्थिति रही। मंच का सफल संचालन श्री राम खटवानी एवं श्रीमती जया जीवनानी ने किया। कार्यक्रम के समापन के पश्चात महिला मंडल द्वारा काली माता मंदिर में माता रानी को चुनरी एवं श्रृंगार अर्पित किया गया तथा खारुन नदी की महा आरती कर नदी को चुनरी एवं श्रृंगार चढ़ाया गया।