जीवन में तरक्की और सफलता का आधार हैं ‘रत्न’, कुंडली देखकर सही रत्न धारण करने से बदलती है किस्मत: आचार्य नंदकिशोर चौबे महाराज
इतेश सोनी रायपुर
दुनिया की बातें डेस्क: मानव जीवन में ग्रहों की चाल और उनका प्रभाव बेहद गहरा होता है। जब भी कुंडली में कोई ग्रह कमजोर होता है या विपरीत फल देने लगता है, तो इंसान का बनता हुआ काम भी बिगड़ने लगता है। ऐसे में ज्योतिष शास्त्र में ‘रत्नों’ को एक अचूक और चमत्कारी उपाय माना गया है। यह बातें छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध और मशहूर ज्योतिष आचार्य नंदकिशोर चौबे जी महाराज ने रत्न धारण करने के महत्व को समझाते हुए कहीं।
आपको बता दें कि आचार्य नंदकिशोर चौबे जी महाराज एक लंबे समय तक अमेरिका (विदेश) में रहकर भारतीय ज्योतिष परंपरा का प्रचार-प्रसार करने के बाद भारत लौटे हैं। वर्तमान में वे छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश में लोगों की जन्मकुंडली का सटीक विश्लेषण कर उनके भविष्य को संवारने का अद्भुत कार्य कर रहे हैं।
आपको बता दें कि आचार्य नंदकिशोर चौबे जी महाराज एक लंबे समय तक अमेरिका (विदेश) में रहकर भारतीय ज्योतिष परंपरा का प्रचार-प्रसार करने के बाद भारत लौटे हैं। वर्तमान में वे छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश में लोगों की जन्मकुंडली का सटीक विश्लेषण कर उनके भविष्य को संवारने का अद्भुत कार्य कर रहे हैं।
रत्नों का महत्व और तरक्की के लिए क्यों हैं जरूरी?
आचार्य नंदकिशोर चौबे जी महाराज ने बताया कि ब्रह्मांड में मौजूद हर रत्न एक विशेष प्रकार की सूक्ष्म सकारात्मक ऊर्जा और तरंगों (Frequencies) का मुख्य स्रोत होता है। जब हम अपनी कुंडली के अनुकूल रत्न धारण करते हैं, तो वह रत्न आकाश मंडल से संबंधित ग्रह की सकारात्मक किरणों को सोखकर हमारे शरीर और मन तक पहुँचाता है।
कमजोर ग्रहों को मिलती है ताकत: यदि कुंडली में तरक्की, व्यापार या बुद्धि का स्वामी ग्रह (जैसे बुध या गुरु) कमजोर स्थिति में हो, तो रत्न पहनने से उसे बल मिलता है।
रुकावटें होती हैं दूर: सही रत्न धारण करने से नौकरी में प्रमोशन, व्यापार में मुनाफा, मानसिक शांति और सेहत से जुड़ी परेशानियां धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं।
आत्मविश्वास में वृद्धि: रत्न व्यक्ति के आभामंडल (Aura) को मजबूत करते हैं, जिससे निर्णय लेने की क्षमता और आत्मविश्वास में भारी बढ़ोतरी होती है।
महाराज जी की सलाह से हजारों जिंदगियों में आया बड़ा बदलाव
आचार्य श्री की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे बिना सोचे-समझे किसी को भी रत्न पहनने की सलाह नहीं देते। वे जातक की कुंडली के लग्न, महादशा, अंतर्दशा और ग्रहों के गोचर की स्थिति का पूरी बारीकी से अध्ययन करते हैं और उसके बाद ही सही रत्ती (वजन) और सही धातु के साथ रत्न धारण करने का सुझाव देते हैं। यही कारण है कि अभी तक जिन लोगों ने भी महाराज जी के मार्गदर्शन में रत्न धारण किए हैं, उनकी निजी जिंदगी, करियर और व्यापार में चमत्कारी बदलाव देखने को मिले हैं।
बिना परामर्श के रत्न पहनना हो सकता है नुकसानदेह
आचार्य नंदकिशोर चौबे जी ने देश के युवाओं और आम जनता को सतर्क करते हुए कहा:
“रत्न शास्त्र बेहद सटीक विज्ञान है। हर व्यक्ति के लिए हर रत्न शुभ नहीं हो सकता। कई बार लोग बिना सोचे-समझे या बिना कुंडली दिखाए शौक में कोई भी रत्न पहन लेते हैं, जिससे फायदे की जगह भारी आर्थिक और मानसिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसलिए हमेशा किसी योग्य विद्वान से अपनी कुंडली की जांच कराने के बाद ही विधि-विधान से रत्न धारण करें।”
अगर आप भी अपने करियर, व्यापार या वैवाहिक जीवन में बार-बार आ रही रुकावटों से परेशान हैं, तो सुप्रसिद्ध ज्योतिष आचार्य नंदकिशोर चौबे जी महाराज से अपनी कुंडली का विश्लेषण करवाकर सही रत्न और सही दिशा का ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं।

