अमोरा में जल जीवन मिशन चढ़ी भ्रष्टाचार की भेंट , खेतों में भी पहुंच गया पाइप
अधिकारी-ठेकेदार पर लगे मिलीभगत के गंभीर आरोप
अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
जांजगीर चाम्पा – केन्द्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन में व्यापक भ्रष्टाचार , अनियमितताओं और धन के दुरुपयोग की खबरें सामने आ रही हैं। ठेकेदारों-अधिकारियों की मिलीभगत से इस योजना पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। जिले के नवागढ़ विकासखण्ड अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत अमोरा (महन्त) में जल जीवन मिशन योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। यहां इस योजना का बुरा हाल है , करोड़ों रुपये की लागत से शुरू की गई इस परियोजना का लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है।
गांव में पानी की गंभीर समस्या बनी हुई है , जबकि योजना के नाम पर लाखों रुपये खर्च किये जा चुके हैं। ग्रामीणों ने ठेकेदार ओम कंस्ट्रक्शन और संबंधित विभागीय अधिकारियों पर मिलीभगत का आरोप लगाया है। ग्रामीणों के अनुसार गांव में पाइपलाइन तो बिछाई गई है , लेकिन अधिकतर घरों तक कनेक्शन ही नहीं दिया गया। कई जगह पाइप खेतों तक तो पहुंचा दिया गया , लेकिन घरों तक पानी की व्यवस्था नहीं की गई।
इतना ही नहीं , पाइप डालने के बाद बिना कनेक्शन दिये ही ढलाई कर दी गई , जिससे अब सुधार कार्य भी मुश्किल हो गया है। स्थिति यह है कि पूरे गांव में केवल तीस प्रतिशत घरों में ही पानी पहुंच रहा है , जबकि बाकी लोग बूंद-बूंद पानी के लिये तरस रहे हैं। गांव में बनी पानी की टंकी भी लीकेज बताई जा रही है। कई जगह नल तो लगाये गये हैं , लेकिन उनमें कनेक्शन नहीं होने से वे बेकार साबित हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कार्य की गुणवत्ता बेहद खराब है और बिना पूरा काम किये ही ठेकेदार को भुगतान कर दिया गया।
इतना ही नहीं , विभाग के अधिकारी भी ठेकेदार को हैंडओवर देने की पैरवी कर रहे हैं , जिससे उनकी भूमिका भी संदेह के घेरे में है। इस संबंध में सरपंच द्वारा कई बार विभाग और अधिकारियों से शिकायत की गई , लेकिन अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई। ग्रामीणों ने बताया कि विभागीय इंजीनियर को भी कई बार समस्या से अवगत कराया गया , लेकिन उन्होंने भी कोई ध्यान नहीं दिया।
गांव में पानी की किल्लत लगातार बढ़ती जा रही है , जिससे लोगों में भारी आक्रोश है। यदि जल्द ही समस्या का समाधान नहीं किया गया , तो ग्रामीणों ने उग्र प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर ओम कंस्ट्रक्शन और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाये , ताकि गांव को पानी जैसी बुनियादी सुविधा मिल सके। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2019 में लाल किले की प्राचीर से इस योजना की घोषणा की थी।
इस मिशन के तहत ग्रामीण जनता के जीवन स्तर में गुणात्मक सुधार की दिशा और दशा निर्धारित की गई , जो आजादी के 75 साल बाद भी नल से जल सरीखी बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित थी। देश के प्रत्येक ग्रामीण परिवार को प्रतिदिन शुद्ध जल आपूर्ति सुनिश्चित कराने के लक्ष्य के साथ जल जीवन मिशन की यात्रा शुरू हुई थी। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती थी कि देश के किसी भी नागरिक को जल आपूर्ति से वंचित ना रहना पड़े। लेकिन आज भी यह योजना कई इलाकों में पूरी तरह से फैल है या फिर आला अधिकारियों की लापरवाही के चलते या भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे होने के कारण आज भी अमोरा जैसे गांवों में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है।
